Indian Gay Sex Story: A tale of two brothers: 3

Indian Gay Sex Story: A tale of two brothers: 3

Indian Gay Sex Story: A tale of two brothers: 3

Indian Gay Sex Story: RO ney kissi tarah RU ko doctor kay pass ley gaya..

डॉक्टर ने बता की RU के पैर में एक फ्रैक्चर था और उसको प्लास्टर लगाना था. प्लास्टर लगाने का काम Nurse ka था जिसको मैं काफी देर से ताड़ रहा था. अब वो Nurse bhi reh reh kar mujhey he dekh rahi thi. साइड वाले रूम में जाते ही उस लड़के Nurse ने मुझसे कहा कि मैं RU को बेड पर बिठा दूं… मैंने RU की हेल्प करके उसको थोड़ा ऊंचे बेड पर बिठाया…

‘लिटा दो’: Nurse boli

Nurse :‘निक्कर नहीं है क्या… ऐसे तो ये सब पैंट खराब हो जायेगी… काटनी पड़ेगी ’
RO: ‘उह… नहीं है यार’
Nurse:‘ऐसे कैसे होगा..’
Then I asked RU: ‘नीचे अंडरवियर है?’
RU in shyness: ‘नहीं’
Nurse: ‘ये काट दूं?’
RU:‘नहीं नहीं’, ‘बहुत महंगी है’
RO: ‘अरे भाई तो प्लास्टर कैसे लगेगा?’
Nurse got irritated and asked to RO ‘तुम्हारे पास नहीं है कोई?’
RU:‘मेरे पास कहाँ से आएगी…’
Nurse:उह… अच्छा रुको… उसको कहते कहते जैसे कुछ याद आया ‘एक पड़ी है… मगर कल वापस कर जाना’
RU:‘अच्छा हाँ कर कर जाऊँगा’

Nurse left the room कुछ देर में एक नीली रंग की शोर्ट्स लेकर वापास आया ‘इसको यह पहना दो’

She gave to me, as when RU tried to lift up… he screem in dedly pain.

‘भाई तू मत हिल यार… फ्रेक्चर है अगर हिल गया तो रोड डालनी पड़ जायेगी… I will help you’

Nurse: ‘इसको समझाओ ज़्यादा हिले दुले नहीं… प्लास्टर लग जाये फिर हिले वरना पंगा हो जायेगा’

RU: ‘हाँ हाँ RO तुम शान्ति से रहो… वरना बड़ी प्रॉब्लम हो जायेगी अभी तो बच गए’ कहते हुए मैं उसके बेड के पास गया. वो एक्चुअली बेड नहीं था वो बड़ा ऊंचा सा बेंच था जिसपर लिटा कर डॉक्टर मरीज़ देखते हैं…उसके नीचे एक स्टूल था… ‘लाओ मैं चेंज करवा देता हूँ’

मैंने उसकी ती शर्ट थोड़ा ऊपर करी ‘ज़रा पकड़ो’ कहकर मैंने उस लड़के को शोर्ट्स पकडाई और फिर RO के लोअर के इलास्टिक में ऊँगली डालकर हल्का सा नीचे करने की कोशिश करी तो RO के चेहरे पर शर्म साफ़ दिख रही थी. उसने अपनी गांढ़ उठाने की कोशिश करी ‘तुम लेते रहो’

Nurse hold RO leegs and said please don’t move much your brother will do the needful.

मैंने जब RU का लोअर उतारना शुरू किया तो तो मेरी साँसें रुकने लगीं… RU के चिकने पेट से होते हुए जब लोअर थोड़ा नीचे खिसका तो पेट के नीचे उसकी रेशमी झांटें दिखीं… और मैंने जब कांपते हाथों से बिलकुल ऐसे प्रिटेंड करते हुए उसका लोअर और नीचे किया कि जैसे मुझपे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है तो उसकी चिकनी जाँघों का ऊपरी हिस्सा झाँका… फिर उसकी झांटें पूरी खुल गयीं…

उसने शायद उन्हें या तो कभी, या बहुत दिन से शेव नहीं किया था…और उनके नीचे उसके लण्ड का ऊपरी पार्ट दिखा…मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा…और फिर मैंने जब और नीचे करते हुए लोअर को उसकी जाँघों से होते हुए घुटने तक उतारा तो उसका लण्ड दिख गया…उसका लण्ड ठीकठाक जवान अच्छे साइज़ का लग रहा था, उस समय तो मुरझाया था मगर पूरा नहीं…वैसे उसकी लेंथ पता चल रही थी…

लगभग आठ इंच का होगा…और उसके नीचे उसके गोल गोल टट्टे थे…मैंने उसकी नंगी जांघ पर हाथ रख कर उसके दोनों पैरों से एक एक करके उसका लोअर उतार दिया और फिर उसके पैरों की उंगलियां सहलाते हुए जब उसके पैरों में नेकर डाली तो वो थोड़ा अकबकाया …अब तो वो मेरे सामने नंगा भी हो गया था इसलिए शायद उसके मन में इस हेल्प के कारण मेरी इज्ज़त और बढ़ गयी थी….

मैंने उसकी जाँघों को हलके हलके उठा कर जब नेकर ऊपर करी तो उसकी जाँघों के बीच टट्टों के नीचे उसकी गांढ़ दिखी…वहाँ जयादा बाल नहीं थे…शायद अभी आना ही शुरू हुए थे, मगर वो मस्त गदराया हुआ लग रहा था, उसके जिस्म में मजबूती थी और मसल्स में कटाव. मैंने उसकी नेकर ऊपर करने के बहाने से उसकी जांघ काफी सहलाई…

Nurse asked from outside: Have you guys done ‘जल्दी कर भाई’
RO: Just a minutue and all done.. Please come

उसके जाते ही मैंने पहली बार RU की आँखों में आँखें डाल कर देखा तो वो मेरे सामने नंगा हो जाने के कारण शर्म से झेंप गया…शर्माते हुए तो वो बहुत सेक्सी लग रहा था. ’

After plaster nurse told to wait, lets doctor examine once.

अभी डॉक्टर साहब देख लेंगे तो प्लास्टर सूखने के बाद चले जाना… अभी पैर पर बिलकुल जोर मत डालना… बहुत नाज़ुक फ्रैक्चर है बहुत ध्यान रखना होगा वरना केस बिगड जायेगा’ फिर उसने मुझे देखा ‘आप आ जाओ… दवा दे दूं और समझा दूं और आप पेमेंट भी कर दो’ She gave me medicine and I came back.

मैं ऊपर आया तो RU थोड़ा परेशान था, मुझे देखते ही पहले तो उसकी नज़र मेरी लोअर पर पड़े उन नए धब्बों की तरफ़ पड़ी… फिर Nurse पर ‘कहाँ थे ?’ उसने पूछा ‘पेमेंट कर रहा था…हो गया अब चलो’ Nurse ने RU को गाड़ी तक लाने में मेरी मदद करी और फिर हम वहाँ से घर आ गए.

फिर कहते हैं ना जब कोई चीज़ होनी होती है तो सब संजोग अपने आप ही बनते चले जाते हैं… वरना उस शाम तक मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि RU उस तरह मेरे सामने अपनी पैंट उतार कर मुझे अपनी गांढ़, लण्ड और जिस्म दिखायेगा…अब होना था तो हो गया.

हम गाड़ी से उतरे तो दुविधा आई RU को ऊपर तक ले जाने की. बहुत मुश्किल से मैंने उसकी मदद करी. एक हाथ उसकी कमर में डाला एक से पास की दीवार पकड़ी. उसने भी एक हाथ मेरे कन्धों पर डाला और दूसरे से दीवार पकड़ी. इस बार बस मैं और वो अकेले थे.

उस समय मेरे साथ भी कुछ वैसा ही हो रहा था. …और दूसरा मैंने नंगा देख लिया था…और अब मैं उसके बहुत करीब था…मैं अपने हाथों से उसके जिस्म की गर्मी और मजबूती महसूस कर पा रहा था.

उसकी कमर पतली तो थी मगर साथ में चिकनी और मज़बूत, वो एक बार में पूरी मेरे हाथ में आ रही थी और चलने में मुझे महसूस हो रहा था कि वो कितनी गठीली और चिकनी भी है. पता नहीं कि RU इस बात को महसूस कर रहा था कि नहीं कि मैं उसकी जवानी से मुग्ध हो रहा था.

हमने उस तरह दो तीन सीडियां चढ़ी… उसके इतना करीब होने की वजह से मैं उसके जिस्म से उसके पसीने और उसकी साँसों की खुशबू तक सूंघ पा रहा था और वो मुझे और भी ज़्यादा मदहोश कर रही थी. फिर हम जैसे ही ऊपर चढ़े मुझे ना जाने एकदम से क्या हुआ… मैं अपने आपको रोक नहीं पाया…,

मैंने कमर में पड़ा हुया हाथ नीचे सरकाया और उसको सीधा RU की गांढ़ की फांक पर रख कर उसकी पूरी गोलाई महसूस करी. RU शायद एकदम से घबरा गया… वो चाह कर भी कुछ कह नहीं पाया और मैंने आराम से लगभग एक पूरे मिनट उसकी गांढ़ को उसकी तरह सहलाया तो मेरे अंदर वासना का एक तूफ़ान उमड़ पड़ा. मैंने उसी तरह उसकी गांढ़ पर हाथ रखकर उसको थोड़ा और ऊपर चढ़ाया…

फिर वो रुका… उसने अपना कंधा दीवार पर टेका और बिना कुछ कहे अपने एक हाथ से मेरे हाथ को अपनी गांढ़ से हटाया… मैंने फिर हाथ उसकी कमर पर रख दिया. उस बारे में ना वो कुछ बोला और न मैंने ही कुछ कहा. हम जब कमरे में आये… RU ने एक नज़र उधर मारी और फिर मैं उसको उसके रूम में ले गया. वहाँ गांढ़ सहलाने और उसके पहले नंगा देखने के बाद पहली बार मेरी नज़र उसकी नज़रों से मिली…

मगर उसके एक्सप्रेशन से मैं कुछ समझ नहीं पाया…मगर इतना ज़रूर देखा कि वो कुछ शरामाया सा था…और उसने झेंप कर अपनी नज़रें अलग कर लीं…उसको लिटाने के बाद जब मैं मुड़ा तो उसने कहा ‘थैंक्स भाई’ ‘कोई बात नहीं यार…’ ‘उह…’ उसने शायद कुछ कहना चाहा मगर कह नहीं पाया…मैंने उसके रूम की लाईट ऑफ करी and left for my room..

Next morning…

मैंने उसके रूम का दरवाज़ा खोला और झाँका… वो बिस्तर पर बिछे बिस्तर पर सर के नीचे तकिया लगाए अपना सर एक तरह मोड़े हुए सीधा चित होकर लेटा हुआ था… मैंने खड़े खड़े उसपर नज़रें दौड़ायीं को उसके प्लास्टर से होते हुए जब मेरी नज़र उसकी नंगी जांघ के रास्ते जब उसकी नेकर पर पहुंची तो मज़ा आ गया क्यूंकि उसका लण्ड शायद अपने आप खड़ा था.

उसकी नेकर में सामने एक तम्बू बना हुया था…और उसने अपने लण्ड के बिलकुल बगल में अपना एक हाथ रखा हुआ था. उसका सांवला जिस्म बेहद नमकीन लग रहा था

मैं उसके लण्ड को पास से देखने के लिए उसके और करीब गया… अब मुझे उसकी नेकर के तम्बू में ये भी महसूस हुआ कि उसका लण्ड हलके हलके हिल रहा था… और एक साइड से तो उसकी नेकर के काफी अंदर तक दिख रहा था… मेरा तो मन मचलने लगा…

मगर मैंने अपने आप पर काफी कंट्रोल रखा और उसके पास खड़ा पर उसको निहार कर उस समय के सीन को अपने दिल और दिमाग में बसा रहा था… तभी RU की आँख खुली… पहले तो उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे, फिर उसको एकदम से दर्द का अहसास हुआ और फिर शायद इस बात का कि उसका लण्ड खड़ा है…

उसने हाथ लण्ड पर रख कर करवट लेनी चाही ‘आह’ दर्द होते ही उसके मुंह से निकला.’हिलो नहीं दर्द होगा…लेटे रहो यार लेते रहो’ मैंने उससे कहा और उसके पास ही बैठ गया तो वो अपने ऊपर डालने के लिए चादर ढूँढने लगा जो उसकी लातों से काफी नीचे हो गयी थी…

’कोई बात नहीं लेटे रहो ना’ मैंने कहा ‘अब पैर कैसा है?’ मैंने पूछा ‘उह्ह हल्का सा दर्द है’ ‘चलो दवा खा लोगे तो ठीक हो जायेगा…आज चलना फिरना मत बस लेटे रहना’ मैंने कहा. ‘जी आज तो बस लेते रहेंगे’.

मुझे तो यह कहने में ही न जाने क्यूँ अंदर से सेक्स सा चढ़ गया…

‘देखूं’ कहकर मैंने उसके प्लास्टर वाले पैर पर हाथ फेरा तो वो बहुत ज़्यादा अकबकाया ‘उह’

RU: Leave it bhai
RO: ‘अरे देखने दो’

कहकर मैंने उसके पैर कि उंगलियां सहलाते हुए इस तरह प्रिटेंड किया जैसे मैं उसकी चोट देख रहा हूँ जबकि सच्चाई तो ये थी मैं उसके जिस्म के स्पर्श का मज़ा ले रहा था… वैसे में उसी बहाने मैंने एक हाथ उसके एक घुटने पर रख दिया…

फिर मैंने उसके दूसरे पैर को छूते हुए पूछा ‘इसमें तो प्रॉब्लम नहीं है ना?’ ‘नहीं नहीं ये बिलकुल ठीक है’ मेरा मन तो हुआ कि उसका लण्ड थाम कर पूछूं ‘कि ये तो बिलकुल फिट है ना?’!!!

फिर शायद उसको भी पिछली रात पूरी याद आने लगी और अब उसके हाव भाव बदलने लगे. उसके चेहरे पर कसमसाहट, शर्म और झेंपने के भाव आने लगे. वैसे में मुझे वो बेहद मादक और मनमोहक लगते हैं…. उस समय जवानी का सारा नमक उमड़ कर RU की आँखों और चेहरे पर आ गया था.

मैंने बात करते करते अपनी नज़र उसके लण्ड की तरफ़ करी. वो झेंप मगर मैं नगई से वहीँ देखता रहा. वो हल्का सा नर्वस होकर अपने हाथ को लण्ड पर रखे था. कभी वो दूसरे हाथ से अपने बाल सही करता कभी उससे अपने जिस्म पर इधर उधर सहलाने खुजाने की कोशिश करता.

फिर उसने उठने की कोशिश करी मगर उसको दर्द हुआ तो मुंह से निकला ‘उनह्हह’ ‘भाई उठ नहीं ना… लेटा रह’ मैंने कहा तो वो बोला ‘ बाथरूम जाना है पिशाब लगा है बहुत तेज़’ ‘अच्छा चल’ मैंने कहा ‘चल मैं हेल्प कर देता हूँ’ कहकर मैंने उसको पिछली रात की तरह सहारा देकर उठाया और जैसे ही उसकी कमर में फिर हाथ डाला मेरे अंदर मस्ती की लहर सी दौड़ने लगी.

अचानक से मेरे मन में वासना कि उमंग भर गयी और दिल तेज़ी से धड़कने लगा. सुबह सुबह एक तो उसकी जवानी में खुमार ज़्यादा था दूसरा गर्म गर्म बिस्तर पर एल्टने से उसके जिस्म में गर्मी भी बहुत थी… उसने एक हाथ फिर मेरे कंधे पर रखा तो दूसरे हाथ से पास की मेज़ पकड़ी, इससे वो पहले की तरह अपने लण्ड को अपने एक हाथ से छुपा नहीं पाया और इस बार हलके कपड़े की नेकर से उसके आधे खड़े लण्ड का पूरा शेप दिखने लगा.

मैंने उसको आराम से ताड़ा तो RU झेंपने लगा…मगर उसके सामने कोई और चारा भी नहीं था ‘आह आह’ जैसे ही चलने में दर्द हुआ उसके मुंह से आवाज़ निकली और मैं उसकी खसखसी आवाज़ से कामुक हो गया. मैं अब फिर उसके जिस्म और साँसों की गर्मी को महसूस कर सकता था.

लड़खड़ाते हुए वो किसी तरह बाहर के उस बाथरूम तक पहुंचा. जब मैं उसके साथ बाथरूम में घुसने लगा तो वो बोला ‘उह्ह… मैं कर लूँगा’ ‘अरे नहीं कर पाओगे… एक दो दिन हेल्प ले लो… फिर आदत पड़ जायेगी… वैसे भी अभी फिसले या फिर चोट लगी तो बहुत प्रॉब्लम हो जायेगी… डॉक्टर ने कहा था’

वैसे बाद में मुझे Nurse ने बता दिया था कि उसका फ्रेक्चर कोई खास नहीं है और वो चाहे तो हल्का फुल्का चलफिर सकता है… मगर मैंने ये बात RU को नहीं बतायी और बड़ा चढ़ा कर सीन खींचता रहा ताकि मेरा काम बनता रहे. उसको उसी तरह बनावटी प्यार से दांता हुआ मैं बाथरूम में ले गया.

दरवाज़ा अंदर से बंद करने का कोई मतलब ही नहीं था क्यूंकि उस वक्त घर में बस हम दोनों ही थे. अब RU थोड़ा हिचकिचाया मगर उसका मेरे बिना काम नहीं चल रहा था ‘उधर देखिये ना’ ‘शर्माओ मत रात में मैंने ही तुम्हे नेकर पहनाई थी’ मेरी बात से तो वो और शर्मा गया.

वैसे वो मुझसे थोड़ा घबराया हुआ भी था क्यूंकि वो अंदर अंदर जानता था कि मेरे साथ वो सब बिलकुल कुछ और ही हो सकता था. वैसे उसका घबराना गलत नहीं था. मेरा तो टारगेट ही RU था.

उसने शर्माते हुए जब एक साइड से अपना लण्ड निकालना शुरू किया तो मैंने कहा ‘उतार दो ना… ये उस को वापस भी करनी है’ ‘उह बाद में…’ ‘अब कौन सी बाद आएगी… अभी दे दो मैं जाते जाते उसको दे दूँगा वरना वो सोचेगा कि तुम लेकर भाग गए वैसे भी वो देने में बहुत डर रहा था’ कहते हुए मैंने उसकी कमर से उसकी नेकर को नीचे खिसकाया तो RU हल्का झेंप और उसने मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश करी…

मगर उससे उसका बैलेंस बिगड़ा तो उसने अपना हाथ वापस दीवार पर रख दिया और मैंने उसकी नेकर नीचे सरकाई तो एक अबर फिर उसकी कमसिन गदराई मस्क्युलर मस्त नमकीन कशिश भरी अंगड़ाई लेती हुयी जवानी मेरी नज़रों के सामने नंगी हो गयी और मेरी आँखों के सामने वासना नाच गयी.

पिछली रात माहौल अलग था. उस समय बस मैं और RU अकेले थे. मैं अचानक कामुक हो गया और मेरा लण्ड खड़ा हो गया. एक एक आकरके उसके पैरों से नेकर उतरने के बाद जब वो एक्सपेक्ट कर रहा था कि मैं उसको दूसरा कुछ पहनने को दूँगा तो मैंने कहा ‘अब मूत लो’ ‘उह ’ उसने कहा… उसका लण्ड भी कुछ कुछ खड़ा था… उसका चिकना सांवला तगड़ा जवान लण्ड देखकर मेरा मन हिचकोले खाने लगा…

उसकी जांघ चमक रही थी ‘बाल शेव नहीं करते हो?’ मैंने जब अचानक कहा तो वो झेंप कर कर बोला ‘उह नहीं…’ ‘क्या यार इतना ज़्यादा बड़ा रखा है तुमने’ ‘उह ठीक है’ ‘इसमें इतना घबराने की क्या बात है…अब पिशाब कर लो…’

उसने अपना लण्ड अपने हाथ में लिया मगर नर्वसनेस के कारण काफी देर उसका लण्ड बस हिलता रहा और उसमे से पिशाब नहीं निकला. मैं एकटक उसके लण्ड को देखे जा रहा था. ‘इधर मत देखिये’ ‘भाई कर लो वरना अटक गया तो प्रॉब्लम हो जायेगी… अच्छा मैं नहीं देख रहा हूँ अब कर लो’ कहकर मने अपना सर साइड में किया…

कुछ देर वो ट्राई करता रहा और उसके कुछ देर बाद उसके मुंह से ‘आह्हह्ह उह्ह्ह्ह’ करके आवाज़ निकली और उसके तुरंत बाद फ्लश से पिशाब की धार टकराने की आवाज़ आई तो मैंने फिर उधर देखा. मगर अब उसका पिशाब रुका नहीं…. वो लगातार मूतता रहा. उसके पिशाब की धार सुन्हेरी थी और काफी मोटी और मर्दानी. ‘रात से नहीं किया था क्या?’ ‘उह नहीं लगा तो बहुत था’

‘अरे तो हमको उठा लेते’ इसपर वो बहुत सी सेक्सी अंदाज़ में मुझे देखते हुए नज़रों में नज़रें डालकर बोला ‘आप बिज़ी थे… सोचा बेकार में डिस्टर्ब हो जाओगे’ उसके ये कहते ही मेरे अंदर सेक्स की एक तेज़ लहर किसी सुनामी की तरह उठ खड़ी हुयी और मेरा हलक सूख गया और उससे ‘उह… मम्म्म… नहीं… नहीं’ कहने में मैं हकला गया और बोलने में दो बार मैंने थूक निगला.

फिर जैसे मैंने अपने आपको उसके इस हमले से संभाला ‘नहीं डिस्टर्ब होता…बुला लेते यार’ ‘चलिए कोई बात नहीं…अब तो काम हो गया ना’ वो काफी देर मूतता रहा. वैसे भी सुबह सुबह का पिशाब काफी लंबा होता है. उसके यह कहने से अचानक हमारे बीच आगे के लिए एक खिडकी सी खुल गयी.

वैसे अभी उसके अंदर अभी काफी संकोच और हिचकिचाहट बाकी थे… फिर भी एक खिड़की से सुहानी हवा आने लगी थी. वो खड़ा हुआ मूत रहा था और मैं उसका लण्ड बिंदास निहार रहा था… वो मुझे अपना लण्ड देखते हुए देख रहा था और उसका सर उसके लण्ड के साइज़ पर दिख रहा था जो लगातार हल्का हल्का बड़ा हो रहा था.

‘वैसे यार’ मैंने फिर टॉपिक छेड़ा ‘तुम रात में बुला लेते’ ‘कोई बात नहीं अरे अब इस सब में डिस्टर्ब नहीं करना चाहिए’ उसने कहा तो मैंने पूछा ‘किस सब में यार’ ‘उह… वोही मतलब… उह… सोने में’ ‘अरे हम सोये नहीं थे… मतलब काफी देर में सोये… मतलब लेते थे नींद नहीं आ रही थी’

उसके लण्ड में और ज़्यादा जान आती दिखी. ‘लो फिलहाल ये towel बाँध लो’ कहते हुए मैंने उसको पास टंगा एक छोटा सा towel दिया ‘उह ये छोटा नहीं है?’ ‘अकेले लेते हो थोड़ा हवा खाना ना… हाहाहा’ कहते हुए मैंने उसकी कमर पर जब towel लपेटा तब तक उसका लण्ड साफ़ उठने लगा था…

मैंने मजाक मजाक में उसको अपनी एक कलाई से सहलाया और कहा ‘अरे देखो अब तुम ठीक हो रहे हो’. उस हलके से पहले स्पर्श से मेरे अंदर स्फूर्ति भर गयी क्यूंकि

उसका कमसिन लण्ड बहुत मस्त गरम था और उसको छूने से मेरी कलाई झनझना गयी.

‘उह ’ उसको अचानक जैसे करंट लगा ‘उह’ उसने उससे ज़्यादा कुछ नहीं कहा.

‘फिर मैं उसको बाहर ले आया और वापस लिटा दिया… मगर अब मुझे लगने लगा था कि मेरे हाथ में बहुत सही मौका है जिसका फायदा उठाया जा सकता है.

बहराल… मैं नहाने के लिए घुसा तो नंगा होते ही मेरा लण्ड फनफना गया और मैं उसको हाथ में लेकर RU को याद करके उसको दबा दबा कर सहलाने लगा और फिर ह्लाने लगा… और फिर जैसे जैसे कामुकता बड़ी… वैसे वैसे मुझे सिर्फ RU ही याद आने लगा…. पिछली कुछ देर के पोरोए सीन मेरी नज़रों के सामने घूमने लगे तो लण्ड में अचानक अपनी ही एक जान आ गयी…

वो पत्थर का होकर उछलने लगा… मैं उसको नहाते में सहलाने लगा और फिर कुछ देर में हमेशा की तरह मैं एक हाथ से लण्ड हिलाते हुए दूसरे हाथ से अपनी ही गांढ़ में उँगल देकर मज़ा लेने लगा… ऐसे में मुझे लगने लगा कि जैसे मैं एक साथ दो दो लड़कों के साथ हूँ…

और फिर कुछ देर में मेरे लण्ड से मस्ती से वीर्य की धार बजबजा कर निकली तो थोड़ी शान्ति मिली. मगर साला नहान पूरा होते होते लण्ड में फिर हरकत होने लगी. उन दिनों मेरे सर पर सेक्स का भूत कुछ ज़्यादा ही चढ़ा हुया था.

मैं नहा धो कर कपड़े चेंज कर रहा था. उस सुबह मेरे मन में बेहद गुदगुदी हो रही थी. सब कुछ बहुत अच्छा लग रहा था. लण्ड भी शांत था. ‘चलो यार ठीक है… मैं जा रहा हूँ… कोई प्रॉब्लम हो तो बता देना… मुझे फोन कर देना मैं आ जाऊँगा’ मैं RU से कहकर निकला. वैसे उस दिन मेरा बिलकुल Shooting जाने का मन नहीं हो रहा था.

अब मुझे पता था की मेरे पास बाज़ी मारने के लिए पूरी रात थी. रात में जब RU बाहर वाले कमरे में टीवी देख रहा था मैं अंदर अपने रूम में उसके लिए बेचैन था. मेरे अंदर बेहद कामुकता भरती जा रही थी. दिन में तो किसी तरह मैंने सब्र कर लिया मगर अब मुझे अपने आप को रोक पाना नामुमकिन होता जा रहा था.

हमेशा की तरह मैंने दारू की बोतल खोल ली… फिर भी जब नहीं रहा गया और नींद नहीं आई तो मैं बाहर गया जहाँ से टीवी की आवाजें आ रही थीं.. RU वहाँ नीचे बिछे गद्दे पर लेटा था. मुझे देखते ही थोड़ा हिला डुला… फिर शायद उसको विस्की की खुशबू लगी ‘उह RO कुछ लगा लिया है क्या?’ ‘हाँ… हाहाहा… तीन पेग’ ‘डेली लगते हैं?’

‘हाँ तकरीबन’ उसके चेहरे पर मुस्कराहट थी ‘अकेले अकेले ही?’ ‘अब क्या करूँ यार कोई और था नहीं साथ देने के लिए हाहाहा’ ‘क्या हमसे पूछा तक नहीं हाहाहा’ ‘उह नहीं यार… तुमको वैसे भी मेरी बातें बुरी लगती हैं… मैंने सोचा तो था मगर फिर सोचा कि तुम उसपर भी बुरा मान जाओगे’

‘ऐसी बात नहीं है RO क्या बुरा मानने वाली बात है हाहाहा’ मैं खुशी खुशी अंदर से अपनी बोतल बाहर ले आया… और उसने जब दो बार माँगा तो उसको काफी हार्ड पेग बनाकर दिए… मतलब मैंने तीन पिए थे और उसको दो में हिन् लगभग छह के बराबर दे दिए… इतना पीने से उसका दिमाग तो तुरंत ही घूम गया… और मेरे मन के मुताबिक साला बहकने लगा.

फिर उसने मेरे साथ सिगरेट जला ली. इस बार बहुत मन होने के बावजूद मैंने उसकी जांघ पर हाथ नहीं लगाया और न ही सेक्स का टॉपिक छेड़ा. शायद वो ये एक्सपेक्ट कर रहा था… इसलिए उसको भी बेचैनी होने लगी थी… आखिर लड़का कैसा भी हो ये सब बातें को सभी को अच्छी लगती हैं… भले उसका मूड हो ना हो.

मैं भी आराम से था… कुछ देर में RU को नशा चढ़ने लगा और उसकी आँखें बंद होने लगीं.

‘आओ अंदर लिटा दूं’ मैंने उसके पास खिसकते हुए कहा. नशे में उसने एक हाथ से अपना लण्ड थामा हुआ था और दूसरे में सिगरेट थी. ‘नहीं नहीं ठीक है नींद नहीं आ रही है… असल में बहुत दिन बाद पीया न तो थोड़ी चढ़ सी गयी…’ ‘हाहाहा …अगर इतनी फटने लगती है तो पीते क्यूँ हो’ कहते हुए मैं आखिर उसकी जांघ पर हाथ रख दिया.

इस बार वो कुछ नहीं बोला, उसने मुझे चुपचाप हाथ रखने दिया. शायद नशे का कमाल था… वैसे भी मैंने उसको मन बनाने के लिए पूरे दिन का टाइम तो दे ही दिया था…. शायद RU की कमसिन जवानी भी हलके हालके आग की लपटों में घिर गयी थी.

‘चलो अंदर लिटा दूं’ मैंने कहा ‘अभी नींद नहीं आ रही है… बाद में जाऊँगा’

मेरा हाथ अब उसकी जांघ को आराम से सहला रहा था… इस बार मेरा हाथ काफी ऊपर तक जा रहा था… बस उसके लण्ड से लगभग टचिंग डिस्टेंस पर… और अब वैसे भी मुझे उसके लण्ड में हलचल महसूस हो रही थी.

मेरे दिल के धड़कने की रफ़्तार बढ़ रही थी. उसकी जांघ चिकनी मगर मज़बूत थी, उसकी स्किन इतनी टाईट थी कि वो चमक रही थी… उसको सहलाने में बहुत मज़ा आ रहा था.

अब माहौल कुछ कुछ गर्म होने लगा था… मुझे उसके लहजे से लग रहा था कि हमारे बीच का शारीरिक सम्बन्ध अब ज़्यादा दूर नहीं है. उसने मेरे उस हाथ पर जिससे मैं उसकी जांघ सहला रहा था कुछ देर में अपना हाथ रख दिया तो मेरा दिल टूटा कि शायद वो अब मुझे रोक देगा…

मगर वो बस नशे में था… उसने मेरे हाथ पर हाथ रखे रखा और मैं उससे उसकी जांघ सहलाने लगा. अब मुझे उम्मीद लगने लगी थी.

‘आ जाओ अंदर नहीं चलोगे’ मैंने बोला तो अपनी आँखों को बंद होने से रोकते हुए बोला ‘उह्हह… क्यूँ… यहाँ क्या दिक्कत है…’ मैंने अब आराम से उसके बगल में जगह बना ली थी और उसकी साँसों की खुशबू सूंघ रहा था. उसकी जवानी का नशा मेरे शराब के नशे को और बढ़ा रहा था.

मैंने उसके बगल में लेटकर एक सिगरेट जलाई और अपना हाथ उसकी कमर पर, जांघ के बिलकुल ऊपर रख दिया और सहलाने लगा. उसका एक हाथ अब हम दोनों के दरमियान था. कुछ देर दोनों ही कुछ नहीं बोले… बस मुझे उसकी साँसें सुनाई दे रही थीं.

अब वो मुझे आराम से अपना जिस्म सहलाने दे रहा था. ज़्यादा ना नुकुर नहीं कर रहा था. वैसे साफ़ पता चल रहा था की उसको नशा चढ़ गया है मगर वो ये बात नहीं मान रहा था.

मैंने एक सिगरेट जला ली और अब उसकी तरफ़ हलकी सी करवट ले ली… मेरी जांघ अब उसकी जांघ से छू रही थी… और उस पोजीशन से मैं उसके पूरे जिस्म को आराम से देख पा रहा था. मेरे सर के पास उसकी बाज़ू थी जिसमे से तीखी पसीने की खुशबू मुझे और मुग्ध कर रही थी.

अब मैं अपने आप को नहीं रोक पा रहा था. सिगरेट के धुंए की धुंद में उसकी जवानी और आग लगा रही थी. मैंने अपना हाथ थोड़ा उसके लण्ड के करीब सरकाया… और मेरी ऊँगली उससे टच हुयी… मैंने हलके से टच पर ही अपने आप को रोक दिया और वेट किया कि शायद वो मुझे रोके…

मगर वो वैसे ही लेटा रहा… अब कहानी बदल गयी थी… ये वो दिन वाला RU नहीं था…

मैंने कुछ पल इन्तेज़ार किया और फिर हाथ थोड़ा और आगे किया तो उसका लण्ड मेरी उँगलियों से टकराया… मैंने बहुत संकोच के साथ घबराते हुए अपनी ऊँगली से उसके लण्ड को हल्का सा टच करते हुए दबाया तो लण्ड में हलचल हुयी… मैं फिर उतना ही करके रुक गया… उसका रिएक्शन देखने लगा… मगर अब उसका रिएक्शन बस तेज़ चलती साँसें थीं… अब उसको आपत्ति नहीं थी.

उसका लण्ड तो मैं रात से देख ही चुका था… अब पहली बार उसको हलके से छूकर मेरी सारी कसर निकल रही थी. वैसे मैं अभी भी पूरा संतुष्ट नहीं था. मुझे डर था कि RU किसी भी समय इस सब पर फुल स्टॉप लगा देगा. मैंने दोबारा उसके लण्ड को अपनी ऊँगली से दबाया और जब उसने फिर कुछ नहीं कहा तो मैंने उसके लण्ड पर हलके से अपनी ऊँगली फेरी. उसका लण्ड जैसा दिखता था वैसा था भी…

मतलब कमसिन तगड़ा और भरपूर जवान. उसको उतना सा सहला कर ही आइडिया लग गया कि साला बिलकुल चट्टान की तरह सकत और शेर की तरह जानदार था. अब तो मेरे अंदर कोतुहल मच गया. मैंने उसकी तरफ़ देखा. वो वैसे ही सीधा लेता था और अपनी आँखें बंद किये था. सोया तो वो नहीं था…

शायद इस बात का इंतज़ार कर रहा था कि मैं अगला क्या करूँगा…मैंने अब एक के बजाये दो उँगलियों से पहले उसका लण्ड दबाया और फिर दबाते हुए ही बिना रुके सहलाया तो उसका लण्ड इस बार मचल कर उछला. RU अब भी चुप रहा. या ये भी हो सकता था कि उसको ज़्यादा नशा चढ़ गया हो.

मैंने हलके हलके उसके लण्ड को कुछ और दबाया… तो उसका लण्ड और उछला… फिर मैंने आव देखा न ताव सीधा उसपर अपनी हथेली रख दी. उसके गर्म कमसिन ताक़त्वर लण्ड को उस तरह पकड़कर मेरे अंदर तो ऊर्जा भर गयी और लगा जैसे की दिन भर का इन्तेज़ार कामयाब हो गया….

फिर मैंने उसके लण्ड पर अपनी उँगलियाँ समेटीं और उसको हलके से अपनी उँगलियों से पकड़ा तो इस बार RU के बंद होठों से एक सिसकारी निकली ‘सिह्ह्ह्ह्ह्हूह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ उसकी सिसकारी ने मुझे ग्रीन सिग्नल सा दे दिया. मैंने तुरंत उसके लण्ड को पकड़ लिया. वो कुछ बोला नहीं मगर उसने अपनी आँखें खोल दीं.

मैं थोड़ा घबराया. मगर वो बस वैसे ही लेटा रहा… कुछ बोला नहीं. मैं फिर थोड़ा आराम से उसका लण्ड दबाने और सहलाने लगा और उसकी सिस्कारियां बढ़ने लगीं और लण्ड में जान भरने लगी और लण्ड उछलने कूदने लगा… अब शायद वो तैयार था… RU शायद अब अपना मन बना चुका था.

फिर वो अचानक उठने लगा तो मैंने सोचा कि ‘साला अब ये फिर नाटक करेगा’ ‘क्या हुआ?’ मैंने पूछा ‘मूतना है’ मेरे जान में जान आई… मैंने कहा ‘कहाँ जाओगे… यहीं कोई बोतल ले आता हूँ उसमे मूत लो’ ‘उह… हाँ… सही है… ले आइये ना’ उसने कहा तो मैंने बाहर पड़ी एक पानी की बोतल उठा ली…

बोतल देखते ही उसने इस बार बिना संकोच या शर्म के अपने गमछे को उठाया… उसका लण्ड बिलकुल सीधा तना हुआ खड़ा था… साला सुबह से कहीं ज़्यादा लंबा और मोटा लग रहा था, उसकी सामने की चमड़ी अपने आप पीछे होकर सुपाडा दिखा रही थी… वो वैसे ही करवट से हो गया ‘लाइए बोतल’ ‘मैं करवा देता हूँ’ मैंने कहा और उसका नंगा लण्ड जब पहली बार थामा तो ऐसा लगा जैसे मेरे अंदर कोई भूचाल सा आ गया हो…

उसका खूबसूरत लण्ड अपनी पूरी जवानी के पूरे नशे में था, वो ऐसा खड़ा था जैसे कोई पत्थर, और साथ में गर्म था और रह रह कर उछल रहा था… मैंने उसके सुपाड़े को बोतल के मुंह पर रखा… कुछ देर RU ने होंठ सिकोड़ कर वेट किया… मगर पिशाब नहीं आया ‘आया भी है या नहीं’ ‘आया है आया है…

साला ऐसे निशाना लगाकर नहीं हो रहा है’ उसने कहा ‘बाथरूम ही चलो’ कहकर वो उठने लगा तो मैंने रोका ‘थोड़ा कोशिश करो ना’ मैंने अभी बोतल नहीं लगा रखी थी… उसने नशे में ध्यान नहीं दिया… इस बार अपने हाथ से लण्ड पकड़ कर कोशिश करी…

और वैसे ही लेते लेते उसके लण्ड से पिचकारी की तरह पिशाब की धार लगभग सामने के टीवी तक पहुँच गयी ‘आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ उसने आंह भरी और इस बीच जब मैंने उसका लण्ड पकड़कर वापस बोतल लगायी तो मेरा पूरा हाथ उसके पिशाब में भीग गया…

अपने जिस्म पर उसका गर्म पिशाब महसूस करके मेरे अंदर ही रही सही आग भड़क गयी… मैंने अपने भीगे हाथों को चाटा… और उसके बाद बोतल नीचे रखकर फिर उसके बगल में लेटने लगा.

लेटते ही उसने पूछा ‘मेरा कैसा लगा?’ ‘उह’ मुझे ये उम्मीद नहीं थी ‘अछ… बहुत अच्छा है’ मेरी आवाज़ अब कामुकता से काँप रही थी. मैंने बोलते बोलते फिर उसका लण्ड थामा और थामते ही मेरी सिसकरी निकल गयी ‘उस्स्स्स्स्स्स्स्स्साआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ RU फिर सीधा लेटा था…

मैंने उसकी तरफ़ करवट ले ली… अब उसका गमछा उसकी कमर पर उठा हुआ था… और मैंने उसके लण्ड को सही से थाम लिया था और सहला रहा था… मेरी उँगलियाँ उसके टट्टे और जांघें सहला रही थीं… हाथ लण्ड दबा रहा था… वो भी मस्ती में था…

मैंने एक हाथ से उसकी छाती सहलाना शुरू करी और फिर हलके हलके उसके जिस्म को सहलाते हुए मैं नीचे होने लगा… बेड पर ज़्यादा जगह नहीं थी… नीचे सरकने में मैं अब आधा बिस्तर पर और आधा उसके बाहर था… मगर जैसे जैसे मैं नीचे सरक रहा था वैसे वैसे मुझे उसका लण्ड अपने होठों के पास आता दिख रहा था…

और जैसे जैसे मैं उसके करीब पहुँच रहा था मुझे उसकी खुशबू महसूस हो रही थी और मेरे डीलिं की धडकन को बढ़ा रही थी. फिर मेरे होंठ उसके लण्ड के इतने करीब थे कि अगर मैं जीभ निकलता तो उससे टच हो जाती…

जीभ के पहले मैंने अपनी हथेली से उसके लण्ड को एक बार सहलाया और फिर उसके सुपाड़े को अपने होठों से थामा तो RU तो जैसे एकदम से उछल गया ‘उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ और बौखलाते हुए उसने मेरे कंधे, सर और हाथ को एक साथ पकड़ने की कोशिश करी…

उस तरह के स्वागत से मेरी ठरक भी पेंग भरने लगी. वो सच में नया था और शायद ये पहली बार था कि कोई उसके साथ वहाँ तक पहुंचा था. उसके रिएक्शन से ही सब पता चल रहा था.

मैंने उसके सुपाड़े को होठों से दबाकर जब अपनी जीभ से सहलाया तो RU और ज़्यादा दीवाना हो गया. उसने मेरे सर को जोर से पकड़ लिया और जब वो मचल रहा था तो उससे ये फायदा हो रहा था कि उसका प्रचंड लण्ड मेरे मुंह में घुसा जा रहा था और मैं उसपर अपने होंठ कसकर उसको चूस रहा था.

उसका लण्ड तगड़ा जवान और नमकीन था. वो सीधा जहाँ तहां मेरे मुंह में टकरा रहा था. इस सब के बीच RU लगातार भयंकर सिस्कारियां भर रहा था… और जब उसको मज़ा ज़्यादा आ रहा था वो वो अपनी गांढ़ हवा में उठा ले रहा था… फिर धीरे धीरे उसने थोड़ा शांत होकर मज़ा लेना शुरू कर दिया….

अब मैं उसकी जांघ और कमर सहलाकर उसके लण्ड को चूसकर मज़ा लेने लगा और वो धक्के दे देकर मेरे मुंह में लण्ड के धक्के दे दे कर मेरे मुंह को चोदने लगा. अब मुझे लण्ड का असली मज़ा आना शुरू हो रहा था. उसका लण्ड मेरे होठों को रगड़ रहा था…

मैं उसको जीभ से सहलाकर थूक से भीगा रहा था. जब कामुकता चढ़ गयी तो RU भी अपना दर्द और पैर की चोट भूल गया… सुबह से वो सीधा लेता था… मगर अब लण्ड चुसवाने के टाइम उसने मेरी तरफ़ करवट ले ली…

उससे फायदा ये हुआ की मैं उसकी जांघ सहलाते हुए कमर सहलाने लगा और फिर अपने हाथ उसकी गांढ़ की फांकों पर सरका दिए और हलके हलके मस्ती लेते हुए उसकी गांढ़ सहलाने लगा. वो अपनी गांढ़ भींच भींच कर मुझे लण्ड मुंह में दे रहा था… और अब बिना कुछ सिखाये उसका हाथ मेरे बालों में घूम रहा था…

और उसका लण्ड मेरे मुंह में घुसकर फूल रहा था और इधर उधर टकरा कर भूचाल मचा रहा था. उसके हर अंदाज़ से लग रहा था कि वो पहली बार ही ये सब किसी के साथ कर रहा था. उसके अंदर एक उतावलापन और कामुक बेचैनी थी जो पहली बार वाले नए खिलाड़ियों में होती है.

वो बड़ी बेताबी और भूख से मेरे मुंह में लण्ड पेल रहा था और जब भी अपने होठों को जकड़ कर उसके लण्ड को चूसता और अपनी जीभ से चाटता तो RU बेचैन होकर सिस्कारियां भरने लगता. मुझे अब उसके जिस्म और उसकी गांढ़ को सहलाने में मज़ा आ रहा था… और RU अब हलके हलके हर चीज़ का मज़ा ले रहा था…

जैसे ही मैंने सही से उसका लण्ड चूसना शुरू किया था RU ने बातें करना बंद कर दी थीं. वो बस तेज़ साँसों और तेज़ सिस्कारियों के साथ मज़ा ले रहा था. मैंने पहले वैसे ही बैठे बैठे काफी देर उसका लण्ड चूसा और इस बीच उसकी सिस्कारियों के बीच उसका गमछा खोल कर उसके जिस्म से हटा ही दिया… अब वो बस एक टी शर्ट पहने था जिसको भी मैंने उसकी छाती तक उठा दिया था.

उसका जवान जिस्म मेरी नज़रों के सामने दहक रहा था… उसकी तेज़ चलती साँसों की वजह से मुझे उसकी छाती और पेट ऊपर नीचे होते दिख रहे थे… मैं अब लण्ड चूसते हुए उसकी छाती सहला रहा था और रह रह कर उसके निपल्स को अपनी उँगलियों से दबा रहा था.

फिर मैंने अपने मुंह से उसका लण्ड निकला तो वो कुछ देर बस हवा में हिचकोले खाता रहा और RU ने सिसकारी भरी ‘उफ्फ्फ्फ्फाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…. क्या… आह्ह्ह्ह क्या हुआ?’ ‘कुछ नहीं…थोड़ा आराम करने दो ना…’ मैंने कहा और वो सब शुरू होने के बाद पहली बार उसका चेहरा देखा.

वो नशे में तो था मगर नींद में नहीं लग रहा था. ‘यही चाह रहे थे?’ उसने पूछा ‘हाँ’ मैंने जवाब दिया. वो बातों से काफी स्ट्रेट फोर्वार्ड लगा जो मुझे पसंद आया. मतलब जो चाहिए वो साफ़ साफ़ बोलो. ज़्यादा इधर उधर की नहीं. फिर मैंने अपनी एक ऊँगली से उसके गालों को सहलाते हुए उसके होठों पर घुमाया ‘उह्ह्ह्ह्ह्ह सिआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…..’

उसने सिसकारी भरी ‘मज़ा आया?’ मैंने पूछा ‘इसमें मज़ा किसको नहीं आयेगा’ वो बोला ‘फिर तुम इतना सब क्यूँ बोल रहे थे?’ मैंने पूछा ‘किसी लड़के के साथ नहीं सोचा था’ वो बोला ‘तो इसमें क्या बुरा है… मज़ा ही तो है’

मैं चुपचाप उसके गाल और होठों को सहलाता रहा ‘साला ये भी लत होती है…’ ‘कोई लत वत नहीं है…’ मैंने उसकी बात पर कहा ‘नहीं समझोगे…आप..हम अपनी बात कर रहे हैं हमारे लिए ये बहुत बड़ी बात है’ जो भी हो मुझे उसकी बातें मस्त तो लग रही थीं.

‘थोड़ा लेटने दो ना’ मैंने उससे अपने बगल में जगह बनाने को कहा तो वो थोड़ा साइड की तरफ़ खिसका… और मैंने फिर फिर उसकी छाती सहलाते हुए अपने होठों से उसके गालों को सहलाया. ‘अब ये सब नहीं हो पायेगा’ वो बोला ‘क्यूँ बस आधा मज़ा लोगे?’

मैंने कहा तो वो बोला ‘अब जो है ऐसे ही चूस चास कर मज़ा ले लीजिए ना… इतना आगे मत बढ़िए’ खैर जो भी था वो अभी भी मुझसे इज्ज़त से ही बात कर रहा था. ‘एक चुम्मा तो ले लेने दो’ ‘अरे रहने दीजिए ना ’ उसने कहा तो मगर जब मैंने अपने होठों से उसके गालों को सहलाया तो उसने हलके फुल्के ना नुकुर के बाद मुझे कुछ खास मना नहीं किया…

और मैं अपने सधे हुए अंदाज़ में उसके गालों को अपने होठों से सहलाते हुए उसके होठं तक पहुंचा तो वो तब भी कच नहीं बोला और बस उसको जैसे ही मेरा इरादा पता चला उसने अपने होठों को जकड़ कर बंद कर लिया..

मैंने जब अपने होठों से उसके होठों को सहलाने की कोशिश करी तो वो मुंह साइड करने लगा और ‘म्मम्मम्मम्म’… मम्म्म’ करके मुझे रोकने लगा. मैंने सोचा कि बनी बनायीं बात बिगड जायेगी इसलिए मैं रुक गया… रुकते ही वो बोला ‘कुल्ली तो कर लीजिए… उह्ह्ह्ह… अभी मुंह में लिए थे अब चुम्मा लेने लगे’

अब मैं समझा… ये भी लड़कों के साथ होता है…वो हाइजीन पर कुछ ज़्यादा ध्यान देते हैं… ’ओह अच्छा’ कहकर मैं जल्दी से कुल्ली कर आया और फिर एक घूँट विस्की भी पी ली…

’लो साफ़ हो गया’ कहते हुए मैं फिर उसकी तरफ़ करवट लेकर लेता और उसकी एक जांघ पर जांघ चढ़ाकर अपने हाथ से उसकी छाती सहलाते हुए उसके बगल में लेटा और फिर से उसके गालों को अपने होठों से सहलाने लगा… इस बार वो सिस्कारियां भर रहा था…

हलके हलके मैंने होठों से उसके होंठ सहलाये… उसने अपने होंठ बंद किये हुए थे… मैं उसके होठों पर होंठ रखकर ही बोला ‘ऐसे ही बंद किये रहोगे?’ शायद उसको किसिंग आती नहीं थी…

‘तो?’ उसने कहा ‘थोड़ा सा खोलो ना’ उसने अपने होंठ थोड़े खोले तो मैंने उसका निचला होंठ हलके से अपने होठों से पकड़ा और फिर उसके अपने मुंह में लेकर उसको चूसते हुए अपने दांतों से पकड़ा तो RU ने फिर अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया फिर मैंने उसके दोनों होठों को जब अपनी जीभ से सहलाया तो वो नर्वस होकर हँसने लगा ‘हेहेहेहेहे…’

‘क्या हुआ?’ मैंने पूछा ‘हाहहाहा’ उसके लहजे में नार्वेस्नेस थी ‘आप तो लग रहा है पूरा गांडू बनाने के मूड में हो हाहाहा’ ‘कोई नहीं बनता यार कुछ… मज़ा लेने का तरीका है सब’ मैंने कहा ‘हाँ आप चूतिया बनाकर अपना काम निकल लो बस हाहाहा’

‘नहीं यार सच… वैसे तुम्हे प्रॉब्लम है तो कोई बात नहीं…’ कहकर मैं हटने लगा तो उसने खुद ही मेरे होठों को अपने पर चिपका दिया ‘अब इतना भड़काने के बाद हटोगे तो सही नहीं होगा… अब तो हो जाने दो… बाद में देखेंगे’ वो तडपते हुए बोला.

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मतलब लड़के पर कामुकता सवार हो चुकी थी…तब मैं भी हँसता हुआ बोला ‘हाहाहा’ वो भी हंसा मगर बोला ‘आप तो इस लाइन के गुरु हो…बड़े भाई तक को नहीं छोड़ा आपने’.

उसने बातों के दरमियाँ मेरे हाथ को अपने हाथ से पकड़ कर मुझे फिर अपना लौड़ा थमा दिया…और मैं उसके नज़दीक जाकर फिर उसके होठों को चूसने लगा…

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