Indian Gay Sex Story: A tale of two brothers: 4

Indian Gay Sex Story: A tale of two brothers: 4

Indian Gay Sex Story: A tale of two brothers: 4

Indian Gay Sex Story: उसने बातों के दरमियाँ मेरे हाथ को अपने हाथ से पकड़ कर मुझे फिर अपना लौड़ा थमा दिया… और मैं उसके नज़दीक जाकर फिर उसके होठों को चूसने लगा… अब कुछ ज़्यादा मज़ा आ रहा था. कुछ देर बाद उसने खुद ही चुम्बन रोका और बोला ‘नीचे जाओ न ज़रा फिर से मुंह में लो’ उसके कहने के अंदाज़ से ही मुझे मस्ती चढ़ गयी…

मैंने फिर नीचे होकर उसका लण्ड चुस्ती हुए अब उसके टट्टे भी सहलाना शुरू कर दिए और वो किसी नाग की हुंकार भरकर सिस्कारियां भरने लगा. वैसे उसके लण्ड की उत्तेजना से मुझे कई बार लगा कि शायद उसका माल न गिर जाये… मैं वैसा होने पर रुक जाता था और फिर कुछ देर बाद फिर से चूसना चालु कर देता था. करते करते उसने फिर से करवट ले ली… और उसके करवट लेते ही मैंने उसकी कमर और गांढ़ फिर से सहलाना शुरू कर दिए.

अब तो RU वासना की पूरी गिरफ्त में था. उसके दिमाग में जो भी चल रहा हो मगर उसका जिस्म अब पूरी तरह कामुक था… इसलिए जब मैंने उसकी ती शर्ट उतार दी तो उसने मेरा पूरा साथ दिया और मना नहीं किया. फिर कुछ देर वो मेरे मुंह में तेज़ धक्के दे देकर मुझे अपना लण्ड चुसवाता रहा. मैं भी उसकी पूरी गांढ़ दबा और सहला रहा था.

उसका छेद बिलकुल टाईट था. सिलवटें बिलकुल एक दूसरे में घुसकर गुथी हुयी थीं और उसकी गांढ़ पर बाल नहीं थे जिससे उसका छेद और दरार सहलाने में बहुत मज़ा आ रहा था. कुछ देर लण्ड सहलाने के बाद वो अचानक बोला ‘सोना नहीं है क्या?’

‘उह’ मैं बोला ‘सोकर क्या करोगे… आज जग लो’ असल में वो मेरा आगे का इरादा जानना चाह रहा था ‘अब नींद आ रही है… नशा भी है ना’ उसने सफाई दी. मगर उसका लण्ड अब किसी तरह नींद में नहीं लग रहा था.

‘अरे थोड़ी देर में सो जाना’ मैंने जवाब दिया तो उसने सीधे पूछ लिया ‘अब तो चुसवा दिया… अब सो जाने दीजिए ना’
RO: ‘मुठ मारते हो?’
RU:‘हाँ… कभी कभी?’
RO: ‘माल झड़ता है कि नहीं?’
RU:‘हाहाहा पूरा झरना निकलता है बन्दूक की गोली की तरह’
RO:‘मुझे नहीं दिखाओगे?’
RU:‘देखेंगे क्या?’
RO: ‘हाँ मगर इतनी जल्दी नहीं’ मैंने कहा

‘इतनी जल्दी? इतनी देर से तो मुंह में दिए हुए हैं अब और कितना लीजियेगा हाहाहा’

‘उह्ह्ह्ह्ह RU कैसी बातें कर रहे हो’ मैंने तड़प कर सिसकारी भरते हुए कहा ‘लौड़ा मुंह में लीजिए ना समझा देते हैं’ उसने कहा और मैंने मुंह खोला… फिर उसने अब मुझे करारे धक्के दे दे कर हलक तक सुपाड़ा फंसा कर चुसवाना शुरू किया तो मेरा तो मज़ा बढ़ गया…

साथ में मैं आराम से उसकी गांढ़ सहलाये जा रहा था. उसके लण्ड और धक्कों में अब नयी जान थी. मगर लण्ड का भूचाल देखकर लग रहा था कि वो बातें चाहे जितनी कर ले अब अपना माल रोक नहीं पायेगा…

इतना तजुर्बा तो मुझे भी था! मगर फिर भी उस अग्रेशन के साथ उसका चूसने में ज़्यादा मज़ा आ रहा था….साथ में वो लगातार ‘उह्ह्ह्ह… आः… सिउह्ह्ह्ह… उह्ह्ह्ह…. उफ्फ्फ्फ्फ्फ़’ जैसी आवाजें निकल रहा था और बेतहाशा मेरे सर और बालों को सहलाये जा रहा था.

मैं भी अब मुंह टाईट करके होठों से उसके लण्ड को दबाकर रगडते हुए अंदर जीभ से पूरा उसको चाटते हुए उसको चूस रहा था… फिर उसकी बढ़ती आवाजों से लगने लगा कि अब सावन आने वाला है! उसके धक्कों की शिददत और आवाजों में बेकारारी बढ़ने लगे थे… उसका सुपाड़ा अब सीधा मेरे हलक तक घुस रहा था…

और उसका छेद और ज़्यादा भींच गया था… अब तो उसपर ऊँगली फेरने में और ज़्यादा मज़ा मिल रहा था… फिर RU की आवाजें अब्धने लगीं ‘आह्ह्ह्ह्हूह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…. हयीईईईई… सिउह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ और उसके धक्कों में गज़ब का जोर आने लगा… वो अपना लण्ड मेरे मुंह से निकल निकल कर वापस पूरे जोर से अंदर घुसाने लगा…

अब कई बार मेरी साँसें रुकने लगीं… मैंने उसके छेद पर ऊँगली दबा दी… और फिर उसका लण्ड पूरे जोर से मेरे मुंह में उछलने लगा… पहले लण्ड केवल उछला… मैंने उसके छेद पर ऊँगली चिपका दी… और उसके बाद की उछाल पर पहली बार वीर्य की भयंकर तेज़ धार निकली…

इस बीच उसका छेद एक बार हल्का सा ढीला हुआ… और फिर इतनी तेज़ी से कसा कि मेरी ऊँगली अपनेआप ही वहाँ फँसी रह गयी.. और साथ में RU ने अब जोर से चिल्लाते हुए सिसकारी भरी ‘आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उह उयीईईअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ और वो हर धक्के पर चिल्लाता रहा और उसका लण्ड मेरे मुंह में गर्म गाढ़ी वीर्य उडेलता रहा…

मैं उसके वीर्य को पी गया… उसके हर धक्के पर उसका छेद भींच जाता… मेरी ऊँगली वहीँ दबी रही… उसका छेद हर बार हल्का सा ढीला पड़ता और फिर कसकर मेरी ऊँगली को दबोच लेता…. फिर RU ढीला पड़ने लगा… कुछ देर तो वो माल झाड़ने के बाद भी लण्ड चुसवाता रहा…

फिर अहिस्ता अहिस्ता वो ढीला पड़ने लगा… RU भी अब ढीला पड़ने लगा… उसका लण्ड भी… मैंने उसको पूरा चूस डाला… और उसके साथ अब उसकी गांढ़ का छेद भी ढीला होने लगा… मैं उसका लण्ड मुंह में लिए लेटा रहा… और कुछ देर बाद मैं खड़ा हो गया और उसको वहीँ लेटा रहने दिया.

उठकर जब उसको देखा तो वोही अहसास हुआ जो किसी राजा को कोई नया किला फ़तेह करने के बाद होता होगा!

वैसे अभी इस किले को पूरा कब्जे में लेना था!

अगली सुबह RU मुझसे नज़र मिलाते ही बुरी तरह से झेंपा… वो मुझसे नज़र ही नहीं मिला रहा था. वो तो मुझे उससे आगे कहानी जारी रखनी थी इसलिए मैं ही उसके पास घुसा रहा और उससे बातें करता रहा. उस दिन मैं फिर उसको मुत्वाने ले गया और उसके बाद मैं चला गया. हमेशा की तरह मुझे RU खूब याद आया.

मैंने सोचा कि शायद फिर RU के साथ मौका लग जाए… थोड़ा RU कि जवानी का और मज़ा लिया जाए!

उस दिन मैं थोड़ा जल्दी ही लौट गया… अब मुझे RU याद आ रहा था… वो मुझे गमछा बांधे हुए लेटा हुआ मिलेगा… कैसे वो मुझे देखकर झेंप कर शर्मायेगा… मैंने सोच लिया था कि अब मैं उसको शर्माने का ज़्यादा मौका न देकर उसको फ्रैंक कर लूँगा… और ज़्यादा फ्रैंक…

जितना वो चुसवाने के दौरान था उतना मैं उसको अब नोर्मली फ्रैंक कर लूँगा… अंदर RU इस बार मुझे देखकर सुबह के इतना तो नहीं, मगर फिर भी काफी शर्मा रहा था… उसकी पिछली रात वाली सारी हेकड़ी गांढ़ में घुसी हुयी लग रही थी… वैसे मुझे पता था कि अगला मौका मिलते ही वो फिर वैसे ही हो जायेगा… बस नया नया था इसलिए थोड़ा झेंप रहा था.

पिछली रात के बाद से वो पहली बार उस तरह से मेरी तरफ़ देख रहा था. मैं समझ गया कि वो कुछ अह्ना चाहता था.

‘क्या हुआ?’ मैंने ही उससे पूछ लिया तो वो हल्का सा झिझका ‘वो… उह… वो’ ‘क्या हुआ भाई… बोलो तुम इतना घबराते क्यूँ हो कुछ कहने में’ ‘नहीं उह… नहीं… वो बाथरूम जाना है…’ ‘बस इतनी सी बात…’ मैंने कहा ‘इसमें पहले कह देते… इतना घबरा क्यूँ रहे हो…
पिशाब करना है या कुछ और?’

‘कुछ और’ कहते हुए वो मुस्कुराया ‘चलो चलो’ उठते उठते वो बोला ‘ दिन में अपने आप ट्राई किये थे… मगर बहुत दिक्कत…’ ‘दिक्कत तो होगी ही… अच्छा मेरी गलती है मैंने ही नहीं पूछा… चलो चलो’ कहते हुए मैं धड़कते मन से उसको सहारा देकर अंदर अपने रूम वाले बाथरूम में ले गया.

‘रुको’ मैंने उसको वहाँ छोड़कर कहा ‘बाहर का दरवाज़ा बंद कर दूं’ कहकर मैं में दरवाज़ा अंदर से बंद कर आया. ‘तुम तो साले आज सुबह से ऐसे रूठे रूठे थे जैसे लग रहा था कि पता नहीं क्या हो गया’ मैंने कांपते हाथों से उसकी नेकर नीचे सरकाते हुए कहा और उसका लण्ड सामने खुलते ही मदहोश हो गया ‘नहीं… उह… भाई ऐसा कुछ नहीं… वो बस…’

‘कोई बात नहीं…’ मैंने खुद ही कहा ‘पहली बार में ऐसा होता है… चिंता कि बात नहीं है’ ‘अच्छा?’ उसने कहा और पूछा ‘हाँ… सबको लगता है कि पता नहीं क्या कर बैठे हैं हाहाहा’ ये पहली बार पिछली रात का खुला हुआ ज़िक्र था ‘चलो बैठो… बैठो…’ करके मैंने उसको बिठाया.

फिर कुछ देर वो शान्ति से बैठकर हगता रहा और मैं बस उसको देखता और निहारता रहा. फिर धोने का टाइम आया तो RU ने फिर झिझक दिखाने की कोशिश करी… मगर उस दिन मुझे साफ़ लग रहा था कि वो चाहता था कि धुलाऊं ‘चुप रहो ना…’ कहते हुए मैंने पानी लिया… और फिर मैंने उसके कमसिन कसे हुए छेद पर उंगलियां फिरानी शुरू करीं तो मुझे न जाने क्यूँ लगा कि RU हलकी हलकी सिस्कारियां भर रहा है…

उसकी गांढ़ पानी से सहलाने में पूरा मज़ा नहीं आया… मैंने फिर पानी भरा… और फिर उसकी धूलि हुयी गांढ़ को सहलाने लगा… पिछले दिन मैंने उसको ज़बरदस्ती जिद करके धुलवाया था… आज वो अपनी मर्ज़ी से धुलवा रहा था… ऐसे में उसकी गांढ़ सहलाने में ज़्यादा मज़ा आ रहा था…

मैंने सहलाते सहलाते उसके सुराख पर ऊँगली फेरते हुए दबाया ‘उह्हह …’ वो अचानक दबी सी सिसकारी भरते हुए बोला ‘मत करिये ना’ ‘थोड़ा बहुत तो करने दो’ और अब आराम से उसकी गांढ़ सहलाने लगा तो मुझे अहसास हुआ की उसका लण्ड ताव में कर खड़ा हो चुका था…. मैंने पीछे से पहले उसते टट्टे हलके से सहलाते हुए दबाये और फिर पीछे से ही पूरा हाथ घुसकर उसका लण्ड थाम लिया ‘आः उह्ह्ह्ह्ह्ह’ उसको मज़ा आया…

शायद वो मूड में था… पिछली रात जो कुछ हुआ उससे उसको मज़ा आया और वो फिर वोही मज़ा चाहता था. वैसे इतना तो मैं भी जानता था कि हमारे पास ज़्यादा टाइम नहीं था… इसलिए जो भी जल्दी होना था. मुझे तो में ये था कि अब मेरे बैंक में RU का खाता पक्का हो गया था! शायद उसके मन में जो भी शंका थी वो वासना की चाहत की बलि चढ़ गयी थी.

‘आओ बाहर चलो…’ मैंने उससे कहा और सहारा देकर ले जाने टाइम मैंने इस बार उसकी कमर नहीं बल्कि गांढ़ में हाथ घुसा कर उसकी मदद करी… उसका लण्ड भी सामने तना हुआ खड़ा था… उसके अंदर हलकी सी शर्म थी, मगर उससे कहीं ज़्यादा मस्ती की चाहत थी ‘लगता है कल मज़ा आया तुमको’ मैंने मुस्कुराते हुए कहा ‘हेहेहे’ वो नर्वस होकर हलके से हंसा ‘जी ’ वो उससे ज़्यादा कुछ नहीं बोला.

‘तुम तो आज शर्माने लगे’ मैंने उसको छेड़ा. वो अपने होंठ सिकोड़ कर सिस्कारियां भरते हुए अपने एक हाथ में अपना लण्ड थामे था ‘मुंह में लीजिए ना… टाइम नहीं है आः सिउह्ह्ह्ह्ह’ उसने बेहद बेताबी से कहा. उसके कहने से ही मेरे अंदर तो आग भड़क गयी… ‘पलंग पर बैठ जाओ ना’ कहकर मैंने उसको पलंग पर बिठाया और अपने घुटनों के बल बैठ कर तुरंत उसके सामने होकर मैंने उसके हाथ से उसका लण्ड अपने हाथ में ले लिया.

उसका सांवला जवान खड़ा हुआ झटके खाता हुआ तगड़ा लण्ड देखते ही मैंने और टाइम नहीं खराब किया और उसके सुपाड़े पर अपनी जीभ फिराई…. RU ने अपनी जांघें चौड़ी कर लीं और तेज़ सिसकारी भरी ‘सिआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ मैंने फिर दो तीन बार बस उसके लण्ड पर जीभ फेरी और उसके टट्टों को हथेली से सहलाया… उसके काले काले टट्टे भी मस्त थे…

मैंने फिर उसके लण्ड को हाथ से उठाकर उसके टट्टों पर जीभ फेरते हुए उन्हें अपने होठों से पकड़ कर हलके हलके खींचा तो RU ने मस्ती से भरते हुए ‘उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ कहते हुए अपनी जांघें आपस में चिपककर मेरे सर को उनके बीच दबाते हुए अपने हाथ से मेरे बाल पकड़ लिए. थोड़ा ढीला पड़ते ही मैंने सीधा उसके टट्टों को अपने मुंह में पूरा भरकर ऊँगली से नीचे उसका छेद सहलाया और दूसरे हाथ से उसका लण्ड दबाना शुरू कर दिया तो RU पागलों की तरह बस सिस्कारियां भरने लगा.

‘आह हाँ आह आह… हाँ चूसो चूसो आह हाँ चूसो’ ‘आह RU बहुत तगड़ा लण्ड है भाई तेरा’ मैंने कहा तो वो खुश हो गया ‘चूसो… अब लण्ड चूसो… आह्हह्ह अब लण्ड चूसो चूसो ना चूसो… ले लो मुंह में चूसो’ ‘बहुत दिल कर रहा है क्या चुसवाने का?’ ‘भयंकर बस बोलो मत चूसो… चुपचाप जल्दी से चूस दो…प्लीज़ चूसो’ ‘और नहीं चूसुंगा तो?’

‘आह मजाक मत करो ना खोलो मुंह खोल ना… खोलो मुंह में लो लौड़ा मुंह में ले लो अब’ मैंने सोचा कि लड़का इतनी ज़्यादा ठरक में है कहीं ऐसा न हो कि साले का बाहर ही झड़ जाये और मज़ा किरकिरा हो जाये… इसलिए मैंने खिलवाड़ बंद करके मुंह खोला और उसके लण्ड को निगलना शुरू किया तो मुझे चुसाई के बीच बस उसकी तेज़ सिस्कारियां ही सुनाई दे रही थीं.

अब जब वो भी मस्ती में भरा हुआ चुसवा रहा था तो उसका लण्ड चूसने में मुझे भी भयंकर मस्ती आ रही थी. वैसे तो वो पिछली रात भी भयंकर था… मगर आज उसकी पूरी मर्ज़ी और चाहत थी… जब आग दोनों तरफ़ लगती है तो हर चीज़ का मज़ा बढ़ जाता है… और उस समय RU की कमसिन जवानी वैसी ही कामुक आग में झुलस रही थी…

उसके दिमाग पर सौ बोतल शराब जैसा नशा था… और उसका अपने आप पर बस नहीं चल रहा था. उस वक्त मैं उससे जो चाहता वो करवा सकता था वो पूरी तरह से वासना की गिरफ्त में था और मेरे हताहों में कठपुतली बना हुआ था…

मैं बस पूरा दिल लगाकर RU के जवान कमसिन लण्ड को अपने होठों से दबाकर जीभ से सहलाते हुए थूक से भीगा भीगा कर होठों से रगडते हुए उसके सुपाड़े को हलक में फंसाकर चुसे जा रहा था और उसके लण्ड की ताकत और जान का पूरा मज़ा ले रहा था. उसके लण्ड की खुशबू मेरे नथुनों में घुसकर मेरे ऊपर और जादू चला रही थी.

मगर दिल तो मेरा भी नहीं चाह रहा था कि वो एपिसोड इतनी जल्दी खत्म हो जाए… दिल चाह रहा ता कि सब रात भर चलता रहे…मैं भी मदमस्त होकर पूरी शिददत और वासना से RU का जवान लण्ड चूस रहा था.. RU का लण्ड कामुकता से झूम रहा था.

‘आह आह्ह उह्हह ’ ‘क्या हुआ झड रहा है क्या?’ ‘हाँ अब रोक नहीं प् रहा हूँ’ ‘नहीं नहीं…… अभी गिरा लेने दो आज… फिर कभी आराम से करेंगे’ उसने कहा. अब वो फ्रैंक होकर बात कर रहा था… ‘लो मुंह में लो… आप बहुत मस्त चूसते हैं’ ‘आह हाँ तुम्हे अच्छा लगता है मेरा चूसना?’ ‘क्या बात कर रहे हैं … इतना मस्त होता है साला दिल और दिमाग साला दोनों जन्नत में पहुचंह जाते हैं…’ वो बोला ‘और लण्ड?’ ‘मैंने पूछा ‘वो तो आपके मुंह में रहता है हाहाहा… अब चूसो बातें मत करो…’ ‘आज फिर माल पिलाओगे?’

‘हाँ… आपको अच्छा लगता है माल पीना?’ ‘हाँ बहुत’ ‘तो पिलाऊंगा… आप जो कहो करूँगा… बस चूस दो चूस दो… आप चूसते हो तो मज़ा आ जाता है’ मैंने फिर उसकी जाँघों के बीच बैठकर उसका लण्ड थाम कर चूसना शुरू कर दिया और कुछ देर में RU मदहोश होने लगा… उसकी आवाजें और सिस्कारियां अब्धने लगीं…

वो रह रहकर मेरे सर को अपनी जाँघों में दबोच लेता… ’अह्ह्ह्ह्ह सिउह्ह्ह्ह्ह’ वो तड़प तड़प कर सिस्कारियां भरता ‘हाँ… अह्ह्ह हाँ’ कुछ देर में वो बोला ‘आह हाँ… आह्ह्ह हाँ अब अब अब अब हाँ आह’ मैं समझ गया कि उसका माल झड़ने वाला है… मैंने अपने होंठ उसके लण्ड पर कस दिए और उसके लण्ड को टाईट करके चूसने लगा….

उसकी जांघें कभी फैल जातीं कभी भींच जातीं… कभी वो मेरे बाल पकड़ लेता और फिर वो चीख ‘उय्य्यीईईईईइआआअह्ह्ह्ह’ और उसके साथ पिछली रात की तरह उसका लण्ड फिर कूदा, और फिर उछला… और फिर उसके लण्ड से वैसे ही वीर्य की तेज़ धार निकलना शुरू हुयी… उसने मेरे सर को भींच लिया और उसका लण्ड मेरे मुंह में कूदता रहा…

मैं उसका पूरा माल पी गया… फिर उसके लण्ड को चाटता रहा, मैं उसको पोरोया निचोड़ता रहा… फिर कुछ देर हम वैसे ही रहे… मैं उसका लण्ड मुंह में लिए रहा… वो मेरे सर को पकड़े रहा… उसके बाद मैंने उठकर उसको नेकर पहनाई और खुद को भी सही किया…

Kuch din yeah silsila chalta reha, aur RU ka plaster cut gaya and all well…

After 1 week:

मैंने RU को देखा… वो अब पस्त होकर लेता हुआ मुझे प्यार से देख रहा था… कुछ देर में RU को नींद आने लगी…

वो थोड़ा हिला डुला… तब मेरा हाथ उसकी जांघ पर था…मैंने उसको वहाँ बिना हिलाए रखे रखा… थोड़ा बहुत हिलने डुलने के बाद RU पूरा उलट कर लेट गया और करवट के कारण वो मेरे इतना करीब आ गया कि मुझे अपने बाज़ू वगरह से उसका जिस्म महसूस होने लगा था. इस बार वो पूरा उल्टा था…

मैंने हलके से देखा तो अब उसकी पतली कमर के नीचे गांढ़ की गोलाई और ज़्यादा सफाई से दिख रही थी… मैं अब रुकने की स्तिथि में नहीं था… मैंने अपने हाथ से उसकी गांढ़ को कुछ बार सहलाया… RU इस बार फिर थोड़ा हिला डुला और उसने वैसे ही उलट कर लेटने में ही अपना मुंह का मेरी तरफ़ कर लिया…

अब मुझे उसकी साँसों की गर्मी महसूस होने लगी… जिससे मेरे अंदर की आंधी एक तूफ़ान बनने लगी थी. अब मैं भी पूरा पलट कर लेट गया और मैंने वैसे ही लेते लेते लण्ड पर लण्ड को पूरा दबा कर उसकी कमर से लेकर उसकी गांढ़ की गोलाई तक सहलानी शुरू कर दी.

अब ज़्यादा मज़ा आ रहा था क्यूंकि मुझे उसकी गांढ़ का पूरा शेप समझ में आ रहा था. कुछ देर फांकें दबाने के बाद मैंने अब उसकी दरार ढूँढी और उसको उँगलियों से सहलाने लगा तो चेहरा मेरी तरफ़ होने के कारण मुझे उसकी साँसें उखडती महसूस हुयीं… फिर जैसे जैसे मेरे हाथ ने उसकी कमसिन गांढ़ को सहलाया और पुचकारा वैसे वैसे उसकी साँसें सिस्कारियों में बदलने लगीं…

मुझे ये तो मालूम था वो जगा हुआ है… लेकिन मैं ये देख रहा था कि वो मुझे इस बार कहाँ तक जाने देगा. मैं भी हलके हलके कामुकता की शिददत बढ़ा रहा था.

जैसे जैसे मुझे उसके जगे होने का अहसास होने लगा वैसे वैसे मेरे अंदर की वासना और बढ़ने लगी और मैं गांढ़ भींच कर लण्ड को बिस्तर पर दबाने लगा. फिर मैंने उसकी कमर पर हाथ डाला तो उसकी टी शर्ट उठ गयी… मुझे उसकी नंगी कमर का स्पर्श हुआ तो मैंने और हाथ सही से अंदर कर दिया…

इस बार उसकी सिसकारी साफ़ सुनाई दी… मैंने अँधेरे में अपनी उँगलियों से उसकी नेकर की इलास्टिक को महसूस किया… मगर अब मैं कपड़ों का बंधन तोडना चाहता था… मैंने अपनी उँगलियों को उसकी इलास्टिक के नीचे सरकाना शुरू किया और उसकी गांढ़ की ऊपरी उठान को महसूस किया और जैसे ही शायद उसको ये पता चला की मैं उसकी नेकर में हाथ डालना चाहता हूँ अचानक उसने एक हाथ पीछे करते हुए मेरे हाथ को पकड़ लिया…

मगर मैं अब मूड में था… मैंने उसके बावजूद अपना हाथ उसकी इलास्टिक के नीचे से उसकी नेकर में घुसाया और फिर कुछ देर के लिए मेरी खुद की सांस रुक गयी क्यंकि मैंने पहले कभी इतनी ज़्यादा मतवाली मक्खन गांढ़ नहीं सहलाई थी… बिलकुल लग रहा था जैसे दो मक्खन के गोले हैं जो मेरी हथेली की गर्मी से पिघल रहे हैं…

और इतनी देर में ऐसा करते ही पहली बार उसके मुंह से हलकी सी आवाज़ भी सुनाई दी ‘ऊंह’ मगर तक तक मैंने उसकी नंगी चिकनी खूबसूरत गांढ़ को सहलाना शुरू कर दिया था…

RU भी शायद कन्फ्यूज्ड था कि क्या करे क्यूंकि उसकी साँसें तो मस्ती के कारण तेज़ चल रही थी मगर वो नेकर के ऊपर से नेकर के अंदर घुसे मेरे हाथ को रोकने की नाकाम कोशिश कर रहा था. मगर उसके रोकने में कोई खास हताशा नहीं थी… वो चाह नहीं रहा था की मैं रुकुं…

फिर मैंने उसकी चिकनी दरार में एक ऊँगली फिराई और उसको एक दो बार फिराते हुए मैंने उसके छेद को महसूस किया तो जैसे मेरी ही जान निकल गयी क्यूंकि उसका छेद तगड़ा टाईट और मस्त था. वो न दिख कर भी मुझे दिख रहा था और सिर्फ उसपे ऊँगली फिराकर मैं समझ रहा था कि वो दिखने में भी बेहद मस्त छोटा और टाईट सा गुलाबी रंग का होगा.

मैंने जैसे जैसे उसके छेद पर ऊँगली फेरी मुझे वैसे वैसे RU की दबी दबी सिस्कारियां सुनायीं पड़ीं. उसकी सिस्कारियों से मेरा जोश और बढ़ रहा था और मेरा लण्ड तगड़ा होकर फनफना रहा था. अब मैं उसके छेद तक पहुँच गया था… मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि वो आगे मुझे कुछ करने देगा या नहीं… मैं इसको लेकर थोड़ा अन्श्योर था…

फिर भी जो मज़ा मिल रहा था मैं वो ये सोचकर ले रहा था कि RU का दिमाग कभी भी घूम जायेगा और वो मुझे रोक देगा. मगर उस समय उसकी बेहद चिकनी दरार के बीच ऊँगली से उसके बेहद कसे हुए मस्त सुराख को सहलाने में बहुत मज़ा मिल रहा था.

फिर मेरा जोश और हिम्मत बढ़े… मैंने उसके छेद पर ऊँगली रखकर उसको दबाया तो RU ने अपनी गांढ़ भींच ली… और तबा मुझे उसकी सिसकारी थोड़ी तेज़ सुनाई दी… मैंने फिर दबाया… इस बार उसने एक हाथ फिर पीछे करके मेरे हाथ का वो हिस्सा पकड़ लिया जो अब भी उसकी नेकर के बाहर था. अब तो मेरा मज़ा और बढ़ गया…

मैंने फिर ऊँगली दबाये तो वो पहली बार बोला ‘उन्हूऊउ’ मगर मैं अब मदहोश हो रहा था… मैंने ऊँगली तो नहीं दबाई लेकिन इस बार फिर से उसकी गांढ़ की दोनों गोल चिकनी मुलायम फांकों पर उंगलियां गड़ाकर उन्हें दबाकर सहलाया और हाथ ऐसे अंदर घुसेड़ा की वो नेकर की ऊपर से अंदर होकर एक नीचे की तरफ़ से बाहर हो गया.

इसके बाद मैंने अपनी सभी उँगलियाँ उसकी दरार में घुसा कर फिर से उसके छेद को सहलाकर कुरेदा और फिर उसमे ऊँगली दबाई… अब तो RU भी कुछ चस्के में लगने लगा था… वो मुझे पूरी फ्रीडम से गांढ़ सहलाने दे रहा था.

जब कुछ देर न रहा गया तो मैंने उसकी नेकर नीचे सरकाने की कोशिश करी… मगर अब उसने मेरा हाथ जोर से पकड़ लिया… मैंने फिर कोशिश करी ‘उह…..’ वो पहली बार कुछ बोला ‘नहीं ….’ उसने मना किया… मैं उससे बातों के बीच उसकी गांढ़ तबियत से रगड़ रहा था. मैंने तडपते हुए कहा ‘उह सो जाइए ना ’ ‘अबे अब नींद नहीं आएगी..’ कहकर मैं उठने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया मैंने सीधे उसका हाथ पकड़ कर सहलाना शुरू किया और सीधा उसको पकड़कर उसको लिपटाने लगा.

पहले तो उसमे कुछ झिझक थी… मैंने उसको लिपटकर उसकी कमर सहलाई तो उसकी साँसें कुछ तेज़ होकर चलने लगीं और फिर मैंने उसकी गांढ़ सहलानी शुरू कर दी तो RU जल्द ही मस्ती में आ गया… मैंने अब आगे अपने लण्ड को उसके लण्ड पर दबा कर फिर से हाथ उसकी नेकर के अंदर घुसा दिया तो अब RU आराम से तेज़ साँसों के साथ आवाजें निकाल कर सिस्कारियां लेने लगा.

इस बार मुझे उसके पूरे टाईट जिस्म का मज़ा मिला… और मैंने फिर उसके छेद पर हमला किया ‘उह भैयाह्ह्ह्ह’ उसने सिसकारी भरते हुए मेरे हाथ को रोका ‘हाथ क्यूँ पकड़ ले रहा है यार’ ‘उह नहीं करो’ ‘अबे भाई मज़ा लेने दे’ मैंने उसकी गांढ़ दबाते हुए कहा ‘उनहू ’ खैर मैंने ज़बरदस्ती नहीं अकरी और उवैसे ही उसके साथ लिपटकर मज़ा लेता रहा…

मैं अब हाथ उसकी टी शर्ट में घुसा कर पोरोया अंदर सहला रहा था… फिर मैंने उसके गालों पर होंठ फिराए ‘उह ’ ‘अब क्या हुआ’ मैंने जैसे ही उसके होठों को होठों से थामना चाह उसने मुंह हलके से घुमाया ‘क्या हुआ यार’ ‘उह …. मत…’ ‘करने दे यार’ ‘आप तो पूरा गे बना दोगे’ उसने कहा ‘नहीं नहीं कुछ नहीं बनेगा… किस करने दे अब’ कहकर मैंने पहले तो उसके गाल को दांत से पकड़ लिया और फिर उसके चेहरे को अपनी तरफ़ घुमाकर सीधा उसके होठों को चूसने लगा तो वो बिलकुल बुरी तरह हाँफकर तदपने लगा…

फिर मैंने उसका हाथ थामा और किस के दौरान ही हल्का सा ब्रेक लेकर ये कहते हुए ‘ले ना ज़रा पकड़ कर सहला’ उसका हाथ अपने लण्ड पर रख दिया तो लण्ड थामते ही RU की बेहद तेज़ सिसकारी सुनाई दी… उसकी गरम सांस सीधा मेरे मुंह में भर गयी.

‘तगड़ा है ना’ मैंने उससे पूछा ‘उह हाँ … बहुत मोटा है’ ‘चल सही से पकड़ कर हिला’ मैंने कहा ‘आप तो मुझे पूरा गे बना रहे हो’ उसने फिर कहा ‘भाई थोड़ा बहुत मज़ा करेंगे… डर नहीं अगर तू ऐश कर लेगा तो गे नहीं हो जायेगा… आह… बहनचोद तेरी गांढ़ बहुत चिकनी है यार’ कहकर मैंने फिर उसके होंठ चूसते हुए उसकी गांढ़ सहलाना जारी रखा.

फिर मैंने उसकी नेकर नीचे सरकाना शुरू करी ‘उनहू ’ ‘अबे तू हर चीज़ में नाटक क्यूँ कर रहा है’ ‘उह … डर लगता है पहले कभी नहीं किया’ मैं बहुत से लड़कों से पहले कर चुका हूँ… ‘अच्छा चल कोई बात नहीं’ ‘

फिर जब हम लेते तो मैंने उसको जोर से पकड़ लिया… और इस बार मैंने उसका लण्ड भी पकड़ लिया जो उसकी एज और एक्पीरिय्न्स के हिसाब से अच्छा खासा बड़ा था… जैसे ही गद्दे पर लेटकर मैंने उसका लण्ड सहलाना शुरू किया वैसे ही उसने मन करना बंद कर दिया….

और अब वो मेरे कंट्रोल में आने लगा. उसका लण्ड मेरे लण्ड की टक्कर का तो था मगर उसमे फ्रेश जवानी थी, मेरे सहलाने से वो उछल रहा था और उसके साथ साथ RU सिस्कारियां भर कर मस्ती से मचल रहा था. कुछ देर हम एक दूसरे का लण्ड पकड़े रहे…

फिर मैंने सोचा की उसको थोड़ा और कामुक कर दूं तो वो नाटक नहीं करेगा… मैंने उसकी जांघ का तकिया बनाकर उसपर पहले तो सर रखा और फिर उसके लण्ड को हाथ से सहलाते हुए अपने चेहरे को उसके करीब ले जाने लगा तो RU थोड़ा बेचैन होकर तड़पने सा लगा…

उसकी तड़प से मुझे लग रहा था की वो शायद सच कह रहा था कि उसने ये सब पहले किसी के साथ नहीं किया है.

फिर मैंने उसकी नेकर बिना उतारे अपने मुह को उसके लण्ड पर रखा और उसको अपने होठों से पकड़ लिया तो RU ने मस्ती से बेताब होकर अपने घुटने मोड़ लिए और तेज़ सिसकारी भरते हुए मेरे सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया… मैंने एक दो बार अपने होठों से उसके लण्ड को दबाया ‘आअय्यीईई उह्हह ’ उसने तड़प कर सिसकारी भरते हुए कहा…

मैं उसके लण्ड को होठों से दबाते हुए अपने एक हाथ से उसकी जांघ रगड़ रहा था… RU अब पूरा बेचैन और कामुक था… अब मुझे लगने लगा कि वो ज़्यादा बातें नहीं करेगा और मुझे नहीं रोकेगा… मेरा अंदाज़ सही था… क्यूंकि मैंने जब इस बार उसकी नेकर नीचे सरकाई तो वो बस मस्ती और वासना से मचलता रहा…और उसकी नेकर खिसक कर नीचे उसके घुटने पर आ गयी…

मैंने तुरंत उसका लण्ड थाम लिया… और उसको पुचकारने लगा… फिर मुझे नहीं रहा गया और मैंने उसकी टी शर्ट ऊपर उठा दी…. उसका गोरा जिस्म मेरे सामने मस्त लग रहा था… मैंने सोचा लोहा गर्म है…

मैं और नहीं रुका और उसकी टी शर्ट पूरी उतार डी… अब वो बस मज़ा ले रहा था… मैंने उसकी नंगी छाती को खूब दबा कर चुचियों पर ऊँगली फेरते हुए सहलाया… और फिर बातों बातों में उसकी नेकर भी उतार दी…

मेरे सामने नंगा होकर RU गद्दे पर लेता ऐसा बेताब और बेचैन होकर तड़प रहा था जैसे किसी मछली को पानी से बाहर निकल दिया गया हो… मैंने अभी अपने कपड़े पहने हुए थे…

उसके पहले मैं उसका पूरा मज़ा ले लेना चाहता था… उसके लिए शायद पहली बार किसी के सामने इस तरह पूरा नंगा हो जाना भी एक सेक्स का पोज़ था क्यूंकि मैं जितना उसको देखता और जितना उसका जिस्म सहलाता वो उतना मचल कर सिसकारी भरने लगता… पूरा होकर वो ऐसा लग रहा था जैसे कोई संगमरमर का पुतला हो जिसमे जान हो…

वो इतना गोरा, कटावदार और चिकना था… उसके नंगे जिस्म को सहलाने में मज़ा आ रहा था… फिर मैं झुका और मैंने उसके लण्ड को होठों से सहलाया ‘उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ कहकर वो गद्दे से जैसे उछल गया… फिर मैंने जब उसका लण्ड मुंह में ले लिया और जांघ समेट पूरा जिस्म सहलाना शुरू कर दिया तो वो बेतहाशा पागलों की तरह मचल कर चीख भरी सिस्कारियां भरने लगा…

वैसे इस क़दर खूबसूरत और हसीन लड़के को अपने पास नंगा पकर मैं भी उतना ही उतावला था जितना वो था… अब मुझे ये डर नहीं था कि वो मुझे रोकेगा.. ‘उह हाँ… हाँ आ रहा… आह्हह्ह…हाँ’ वो सही से बोल नहीं पा रहा था… उसकी सांस उखड़ रही थी और गला सूख रहा था… वो कामुकता से तड़प रहा था…

फिर मैंने उसका कुछ देर लण्ड चूसकर उसको मज़ा दिया और फिर उसको अपने हाथों से पलट दिया… उसका जिस्म बिलकुल वैसे परफेक्ट शेप में था जैसे गे ब्लू फिल्मों में लड़कों का होता है या ब्लू फिल्मों में लड़कियों का… मैं कुछ देर तो बस बैठकर उसके जिस्म को हाथों से रगड़ता रहा… और फिर न रहा गया तो मैं झुका और दोनों हाथों से उसकी गांढ़ फैलाते हुए मैंने जैसे ही जीभ से उसका छेद टच किया…

‘उह्ह्ह्ह्ह्ह भैयाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह’ उसको जैसे करेंट लग गया ‘उह्ह भैयाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…. अह्ह्ह…. भैयाह्ह्ह्ह्ह… उह्ह…. क्या कर रहे हो आह’ ‘क्यूँ?’ ‘… ऐसे लगा जैसे करेंट लग गया हो’ ‘मज़ा लो… मज़ा आयेगा’ कहते हुए मैंने अपना मुह उसकी गांढ़ में घुसा कर ऐसे सूंघ जैसे कोई गुलाब का फूल सूंघता हो…

अब RU और ज़्यादा मचल रहा था… मैंने फिर अपने होठों को उसके छेद पर चिपका दिया और उसकी दोनों फांकों को मसलने लगा… वो तदपने लग… वो जितना मचलता और जितना उछलता मुझे उतना ज़्यादा मज़ा आता… फिर मैंने उसको जोर से पकड़ कर उसके छेद में जीभ सरकाई ‘उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ उसने सिसकारी भरी…

अब मैंने थूक का सहारा लेकर अपनी ऊँगली फिर उसके छेद पर सरकाई और इसके पहले कि वो मेरा इरादा भांप पता मैंने घप से लगभग आधी ऊँगली उसके छेद में गुसेद दी तो वो एकदम से चिहुक गया…

‘उह्हह …क्या…क्या…उह…क्या कर रहे हो उह्ह’ ‘क्यूँ क्या हो गया’ ‘निकालो … तकलीफ हो रही है आह’ ‘कोई बात नहीं… पहली बार है न इसलिए थोड़ी चुभन होगी… आराम से रहो’ ‘उह … आप बहुत डेंजर हो’ ‘डेंजर नहीं यार… मज़ा लो… पूरा मज़ा लो… आराम से रहो डरो नहीं मज़ा लो’

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अब मैंने अपना लण्ड खोला… और नंगा होकर उसके बगल में बैठा… और पहले कुछ देर उसको लण्ड थमाया.. ‘उह …. ह्यूज है मैसिव… तू बिग ’ उसने कहा ‘नहीं नहीं… लोगों के इससे भी बड़े होते हैं ‘ ‘आपका ही मिसाईल जैसा है उह’

फिर मैंने उसकी जाँघों के बीच जगह बनायीं और लण्ड को उसकी गांढ़ पर दबा कर रगड़ा ‘उह … नहीं… प्लीज़… इट्स तू बिग… डोंट ट्राय एनिथिंग एल्स’ ‘कुछ नहीं त्रय कर रहा हूँ… हाहाहा… फट क्यूँ रही है?’ और ‘इतना बड़ा है फटेगी नहीं’ ‘चुपचाप लेटो… मज़ा लो’ कहकर मैं आराम से जैसे लण्ड से उसकी गांढ़, जाँघों और कमर की मालिश करने लगा…

To be continued…

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