Indian Gay Sex Story: A tale of two brothers: 5

Indian Gay Sex Story: A tale of two brothers: 5

Indian Gay Sex Story: A tale of two brothers: 5

Indian Gay Sex Story: फिर मैंने उसकी जाँघों के बीच जगह बनायीं और लण्ड को उसकी गांढ़ पर दबा कर रगड़ा ‘उह … नहीं… प्लीज़… इट्स तू बिग… डोंट ट्राय एनिथिंग एल्स’ ‘कुछ नहीं त्रय कर रहा हूँ… हाहाहा… फट क्यूँ रही है?’ और ‘इतना बड़ा है फटेगी नहीं’ ‘चुपचाप लेटो… मज़ा लो’ कहकर मैं आराम से जैसे लण्ड से उसकी गांढ़, जाँघों और कमर की मालिश करने लगा…

लण्ड की गर्मी से उसको मज़ा मिलने लगा… वो थोड़ा आराम से होने लगा ‘पहले सच्ची में नहीं किया?’ ‘नहीं क़सम से…’ ‘दिल भी नहीं किया?’ ‘दिल तो बहुत किया … सच… झूठ नहीं बोलूँगा… दिल बहुत दिन से कर रहा था’ ‘किस चीज़ का…?’ मैंने पूछा और इस सब बातों के दौरान मैं सुपाड़े को रह रहकर उसके छेद के पास रोक दे रहा था और उससे उसके छेद की सिलवटों को सहला रहा था और सुपाड़े को हलके हलके वहाँ दबा भी रहा था…

उसका ध्यान बातों पर था इसलिए उसका छेद कसा नहीं था… और शायद उसको लण्ड की गर्मी से बहुत मज़ा भी मिल रहा था… मुझे अपने लण्ड पर उसके गर्मी का मज़ा मिल रहा था जिसके कारण मेरा लण्ड रह रह कर भूचाल की तरह उछल रहा था… मैं उसको बताओ में लगाकर मज़ा ले रहा था… इसी सब का आह’ उसने कामुक सी आवाज़ में जवाब दिया ‘मतलब ये इस तरह…पीछे लण्ड लगवाने का?’

‘उह… हाँ ये … मतलब येही सब’ ‘भाई सच सच बता ना मज़ा आयेगा… अब क्यूँ शर्मा रहा है’ ‘उह … एंट्री मत करवाओ… आपका साइज़ बहुत बड़ा है ’ ‘नहीं कर रहा यार कुछ तू बता ना… मज़ा आ रहा है तेरी बातों से’ ‘ मैंने कभी किया नहीं है’ वो बातों में था…

मैं अब हलके हलके सुपाड़े को उसके छेद पर दबा रहा था और उसपर उसकी सिलवटों की गर्मी महसूस कर रहा था. उसकी गांर बेतहाशा कुलबुला रही थी और उसकी साँसें बात अकरने में उखड़ रही थीं… ’जान के क्या करोगे ’ ‘बताओ न’ मैं उसकी पीठ को होठों से सहलाते हुए बोला तो उसने फिर सिसकारी भरी…

मैंने पीठ से होठों को उसके कंधे पर सरकाते हुए उसके कान को किस करके होठों से पकड़ कर उनके अंदर जीभ से सहलाया ‘उह्ह्ह्ह भैयाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह मत करो…. उह्ह्ह्ह्ह’ वो उसी में उलझा था और इधर मैंने अपने परिकम से भीगे लण्ड को उसकी गांढ़ पर दबाया तो उसका छेद कुछ चौड़ा हुआ… मगर उसका ध्यान अब भी कान में होती गुदगुदी पर था…

उसकी सिलवटें फैल रही थीं… मुझे उनके अंदर से आती गर्मी का अहसास हो रहा था… उसकी गांढ़ मेरे प्रिकम के साथ मेरे थूक से भी भीगी थी जिसके कारण अच्छा लुब्रिकेशन हो रकह था और मेरा सुपाडा उसपे फिसल रहा था… मैंने तभी लण्ड को साध कर थोड़ा दबाया तो उसकी सिलवटें चरमरा कर फैली और सुपाड़ा अंदर फिसल गया ‘उह’ अचानक उसकी सांस रुक गयी और उसने मेरे एक हाथ को पकड़ कर अपने छेद को कस कर भींच लिया…

मैंने लण्ड को दबाए रखा क्यूंकि अगर मैं दबाता नहीं तो वो बाहर सरक जाता और फिर मुझे अंदर घुसाने में पूरी मेहनत करनी पड़ती ‘थोड़ा गांढ़ ढीला अक्रो’ ‘उह नो… नो… डोंट दो दिस… यू आर टू बिग’ बहुत दिनों बाद कोई चुदाई के दौरान अंग्रेजी में बातें कर रहा था… मुझे फिर भी उससे देसी भाषा में बात करने में ही मज़ा आ रहा था…

मेरा सुपाडा उसके छेद में फंसा था और उसके अंदर किसी ज्वालामुखी जैसे गर्मी को महसूस कर रहा था… ‘कुछ नहीं होगा… बस आराम से रहो… मज़ा लो तो कुछ नहीं होगा’ मैंने उसके कंधे को सहलाते हुए फिर उसके कान को सहलाया ‘उह… बहुत बड़ा आह आह्ह्ह्ह्ह मत…. आह भैयाह्ह्ह्ह’ मैं लण्ड लगातार दबाए जा रहा था… RU जितना अंचल रहा था उतना मेरा दबाव बढ़ रहा था और लण्ड अंदर की तरफ़ घुस रहा था…

’शान्ति से लेट ना यार शान्ति से लेट इतना हिलडुल मत… आराम से लेट… पहली बार है इसलिए थोड़ा टाईट है…’ ‘उह्हह भैयाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह नहीं… नहीं हो पायेगा… प्लीज़ पुल इट आउट’ ‘यार तू इतना शोर मचा रहा है… आराम से रह देख मज़ा आयेगा’ ‘नहीं… बहुत फट रही है मज़ा कैसे आयेगा आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ मैंने इस बार थोड़ा तेज़ धक्का लगाया जिससे लण्ड काफी अंदर घुसा गया और उसकी लगभग चीख निकल गयी.

मगर उसके कसे हुए छेद की गुथी हुयी चुन्नटों के बीच जब मेरा लण्ड रगड़ खाता हुआ अंदर घुसा और उसने अपनी फांकों को भींचा तो मेरे अंदर वासना की लहर दौड़ गयी और ऐसा लगा जैसे जैसे मैंने किसी अंगूठी में लण्ड घुसा दिया हो… मुझे लण्ड पर उसकी गांढ़ की गर्मी महसूस हुयी… मैंने उसको जोर से दबाया क्यूंकि वो मेरे नीचे से मचल कर खिसकने की कोशिश कर रहा था…

उसको दबाने में जोर लग रहा था जिसके कारण लण्ड हलके हलके और अंदर सरकता जा रहा था ‘उह्ह नहीं… नो नो … नहीं… प्लीज़ डोंट दो… आह बहुत… बहुत दर्द हो रहा है’ ‘भाई मेरी बात मान ना… तू चुपचाप लेट’ ‘कैसे चुपचाप लेटूं… का बहुत मोटा है ’ ‘मान तो यार… देख अच्छा एक बार आराम स एलेट फिर कहना… तू लेट तो चुपचाप’ मेरे ये कहने पर वो चुप हो गया….

मैंने लण्ड नहीं दबाया मगर वैसे भी लण्ड आधे से ज़्यादा उसकी गांढ़ में था… मगर जब वो शान्ति से लेटा तो उसका छेद कुछ अडजस्ट हुआ… मैंने उसके कंधे को सहलाया और उसके गालों पर होठों से सहलाया ‘देख… आराम मिला ना?’ ‘उह हाँ… थोड़ा थोड़ा… मगर अब निकल दो ’ ‘ये पहली बार है ना?’

‘कितनी बार कहूँ…हाँ’ ‘इसलिए थोड़ा दर्द हो रहा होगा… धीरे धीरे सही हो जायेगा… बस तू आराम से रह आराम से लेटने में गांढ़ रिलैक्स्ड हो जाती है’ वो लेता रहा ‘अब मज़ा आया?’ मैंने कुछ देर में पूछा ‘पता नहीं हाहाहा…’ वो पहली बार थोड़ा नर्वस होकर हंसा ‘मगर आपने फाड़ डी है हेहेहे’

‘सही से बता…मज़ा नहीं आ रहा है क्या?’ ‘उह आ तो रहा है मगर …’ ‘क्या?’ मैंने पूछा ‘ऐसे लेटने में न…. ऐसे लेटने में टट्टी लग रही है’ ‘हाहाहा… ऐसे ही रख वो लगता है वैसे… मगर होती नहीं है… पहली बार में ऐसे लगता है… मगर कभी होती नहीं है’ ‘पता नहीं… क्यूंकि मुझे तो लग रही है’ ‘इसका मतलब तेरी गांढ़ अब अडजस्ट हो गयी है’

मैंने फिर बातों बातों में लण्ड और अंदर घुसेड़ा और वो आराम से अंदर सरका और फिर जहाँ वो अटका मैंने जोर लगाया और RU ने फिर कहराते हुए सिसकारी भरी ‘उह्हह… बस बस बस… अब और नहीं इतना अंदर काफी है’ उसके मचलने और बातें करने से मेरे अंदर की ठरक और कामुकता बढ़ रही थी.

RU चिकना तो था ही साथ में बेहद दिलकश और सुन्दर भी था, उसकी गांढ़ कसी हुयी तो थी ही मगर उसके अंदर की चुदने की आग से उसका मज़ा और बढ़ रहा था. अगर मैं उस समय चोदना बंद कर देता तो RU का दिल टूट जाता… वो चुदना भी चाह रहा था और उसको दर्द भी हो रहा था… इस सब में बहुत मज़ा आ रहा था…

कुछ देर मैंने कोई बात नहीं करी… मैं बस हलके हलके धक्के देता रहा… कभी थोड़ा सा लण्ड बाहर खींचता फिर उसको वापस अंदर धकेलता… और ये काम मैं बहुत अहिस्ता अहिस्ता बहुत आराम से कर रहा था जिससे RU की गांढ़ पर जोर नहीं पड़ रहा था और वो प्रेम से धीरे से खुल रही थी…

लण्ड अंदर बाहर करने में मुझे लण्ड पर उसकी गुलाबी सिलवटों की मखमली रगड़ महसूस हो रही थी… फिर जब लगभग एक इंच लण्ड बाहर रह गया तो वो फिर फंसा… मैंने जोर लगाया तो RU फिर थोड़ा उछला ‘उह्ह्ह्ह्ह भैयाह्ह्ह्ह्ह्ह आराम से आराम से… आह आह्ह भैयाह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है’ ‘झूठ मत बोल यार’ मैंने कहा ‘इतना मोटा खम्बा अंदर घुसाते हो… दर्द नहीं होगा क्या?’

‘हाहाहा’ मैं हँस दिया ‘सच बोल… मज़ा आ रहा है ना’ ‘उह्ह… अब मज़ा तो आयेगा ही ना… मगर प्लीज़ थोड़ा स्लो करो… जब आप स्लो स्लो करते हो ना तब ठीक लगता है’ ‘आये हाय मेरी जान… इतनी देर से तेरी स्लो स्लो ही तो ले रहा हूँ डार्लिंग’ ‘उह आप बहुत बेशर्म हो हाहाहा’ ‘तो क्या हुआ तू भी बेशर्म बन जा देख फिर और मज़ा आयेगा’ अब मेरा लण्ड उसकी गांढ़ में पूरा घुसा हुआ था…

और बातें करने से थोड़ा वो भी रिलैक्स हो गया था इसलिए दोनों को ही मज़ा मिल रहा था… मैं अब लण्ड बाहर खींच खींच कर वापस अंदर दे रहा था… कुछ देर में मैंने इसी तरह चुदाई की स्पीड बढ़ाई… मगर कुछ देर में जब लण्ड अंदर जाकर टकराने लगा तो RU ने मुझे रोका ‘उह्हह ऐसे दर्द होता है’ मगर जो भी उस समय मज़ा बहुत आ रहा था…

इतना खूबसूरत हसीन जवान नमकीन सा चिकना लड़का पेलने में बहुत मज़ा आता है.

अब RU भी पूरी गर्मी और कामुकता में था. ‘क्यूँ अब टट्टी आ रही है?’ मैंने पूछा तो वो बोला ‘नहीं अब नहीं’ ‘इसीलिए बोला था… गांढ़ ढीली रखी जाती है… ढीला रखने में सही रहता है’ ‘पहली बार था न … ज़्यादा एक्सपीरियंस नहीं है’ ‘कोई बात नहीं तुझे भी सब एक्सपीरियंस दे दूंगा’ ‘न बाबा आप पूरा गे बना दोगे’

‘जिसमे तुझे मज़ा आये वो करना… मैं क्या बनाऊंगा… अब मैंने थोड़ी बोला गांढ़ मरवाने को’ मैंने गांढ़ में धक्के देते हुए कहा ‘देख अब तू आराम से खुद ही मरवा रहा है ना’ ‘डर लगता है ’ ‘किस चीज़ से?’ ‘गे बनने से’ ‘डरना नहीं चाहिए… जो दिल करे वो करो और मज़ा लो… इतना सोचो मत’

कुछ देर वो चुप रहा ‘चलो डार्लिंग थोड़ी गांढ़ उठाओ ना’ मैंने उसकी कमर सहलाते हुए कहा ‘क्यूँ?’ ‘देखना गांढ़ उठाओगे तो सटीक अंदर जायेगा’ वैसे गांढ़ उठवाते उठवाते मैंने उसको वहाँ खुली छत पर गद्दे पर घोड़ा बना दिया और उसके ऊपर चढ़कर धमाकेदार चोदना चालु कर दिया… वो अब कभी मस्ती और कभी दर्द से आवाजें निकालने लगा.

उसको चोदते समय हम दोनों की सांसों की आवाज़ और सिस्कारियों के बीच मुझे संगीत जैसा लग रहा था… लग रहा था की चुदाई के दौरान कान में संगीत बज रहा हो… मेरा लण्ड किसी ज्वालामुखी की तरह गर्म हो गया था और भयंकर हुंकारें भर कर पूरे जोश में था… RU की गांढ़ वैसे तो टाईट थी मगर मेरे लण्ड के प्रहारों से अब खुल गयी थी और उसके रिएक्शन से लग रहा था की उसको भी अब फुल मस्ती आ रही थी…

मैं उसको सहला सहला कर कुचलकर दबा दबाकर नोचते हुए उसके जिस्म का मज़ा लेते हुए उसकी गांढ़ की गर्मी का पूरा मज़ा ले रहा था… खुले आसमान के नीचे उसकी कमसिन चिकनाहट का पूरा मज़ा अलग था.

‘बहुत मस्त डार्लिंग बहुत मस्त… बहुत सही जा रहे हो जानू….’ मैंने मस्ती से कहा ‘आह भैयाह्ह आह आह भैय्हाआह्ह्ह्ह्ह्ह उह्हह ’ वो भी कुछ कुछ बोल रहा था और मेरे मज़े बढ़ा रहा था ‘जानेमन अब सब ठीक लग रहा है ना?’ ‘उह्ह हाँ… मगर ऐसे ही आराम आराम से काम करो’ ‘हाँ ऐसे ही करूँगा… मगर बीच बीच में जोश बढ़ जाता है’ ‘उह तब दर्द सा होता है’ ‘अब टट्टी तो नहीं आ रही है ना?’

‘नहीं अब नहीं… शुरू में बहुत लग रहा था वैसा’ ‘हाँ नए नए में होता है’ ‘मेरी सील टूट गयी क्या अब?’ ‘हाँ अब तू कुंवारा नहीं रहा… तेरी गांढ़ खुल गयी अब… अब बाद में देखना और मज़ा आयेगा…’ ‘आप बाद में भी करोगे?’ ‘उसने पूछा तो मैंने उससे पूछा ‘क्यूँ तू करवाएगा नहीं बाद में?’ ‘उह हाँ हाँ… मगर मैं गे बन गया तो?’ ‘यार टेंशन मत ले… जो बनना है बन जाना… वैसे थोड़ी बहुत मस्ती से कोई कुछ नहीं बनता… बोला ना…देख तुझे मज़ा आ रहा है ना?’

‘हाँ ’ उसने जवाब दिया ‘तो बस मज़ा ले… इतना सोच क्यूँ रहा है’ मैंने कहा ‘…’ ‘क्या’ उसने फिर पूछा ‘RO आप गे हो?’ ‘देख भाई पता नहीं मैं क्या हूँ… मगर मुझे मज़ा आता है इस लिए करता हूँ’ ‘और लड़कियों के साथ?’ ‘ओए तेरी अह अह भैयाह आप बहुत सही चीज़ हो’ ‘चीज़ तो तू भी बहुत सही है… फ़िलहाल गांढ़ में लण्ड का मज़ा ले…’ कहकर मैं कुछ देर चुप रहा उसने बीच में कुछ बात करने की कोशिश करी और एक दो बार ‘…?’ बोला मगर मैं चुपचाप मज़ा लेता रहा.

मुझे उस समय सच में उसकी गांढ़ की गर्मी का बहुत मज़ा मिल रहा था और उसके साथ उसका चिकना जिस्म सहलाने में… वो भी साथ में आंहें भरता रहा… फिर कुछ देर बाद वो घोड़ा बने बने थक गया तो पूरा उलट कर लेट गया…

मैं उसके ऊपर चदकर उसकी गांढ़ में धक्के देता रहा… हमारी चुदाई को काफी समय हो गया… नीचे कभी सेक्योरिटी गार्ड के डंडे की आवाज़ आती कभी कुत्तों के भौंकने की… और ऊपर हम आंहें और सिस्कारियां भरते हुए मज़ा लेते रहे… वैसे अब उसका छेद काफी खुल गया था और मेरा लण्ड आराम से उसमे अंदर बाहर फिसल रहा था…

फिर कुछ देर में लण्ड बेकाबू होने लगा और मैंने चुदाई की स्पीड बड़ा दी… ’उह ’ वो बोला ‘थोड़ा आराम से करो ना’ तो मैंने कहा ‘बस थोड़ा सा झेल ले भाई… अब बस गिरने वाला है… आराम से नहीं होगा… थोड़ा बर्दाश्त कर ले आह’ ‘उह्हह भिया… बहुत… उह… भैयाह… नो… उह भैयाह… फिर दर्द होने लगा आह ’

‘बस थोड़ा सा होगा थोड़ा सा और बस थोड़ा सा दर्द झेल ले’ अब तो मेरे अंदर जैसे बिजली के करंट के झटके लग रहे थे और टट्टों से एक लहर निकल कर मेरे जिस्म में दौड़ रही थी… मेरे होश उड़े हुए थे और तन बदन में एक मस्ती की लहर सी दौड़ रही थी… अब तो मैं चाहता भी तो अपनी स्पीड या इरादा नहीं बदल सकता था…

मैं अब पूरी ताकत और एत्जी से RU की गोरी चिकनी कमसिन गांढ़ में धक्के दे रहा था और ‘धप धप धप छप छप धप’ की आवाजों के साथ मेरी सिस्कर्रियों और उसके कहराने की आवाजें गूँज रही थीं. अब कामुकता और उसकी मस्ती पूरे धमाल चरम पर थी…

मेरा लण्ड RU से गांढ़ से सरसरा कर बाहर आता और फिर पूरी ताकत के साथ ऐसे वापस घुसता की उसका टोपा अंदर कहीं जाकर जोर से टकराता… अब RU फिर कहराते हुए आंहें भर कर हलके हलके हर धक्के पर चीक देता… ‘आयी ऊह्ह्ह्ह्ह्ह्ह भैयाआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उह्हह स्लो स्लो… प्लीज़ डोंट… नो…आह स्टॉप ’ मगर मुझे अब कुछ सुनाई नहीं दे रहा था…

फिर मुझे अंदर से माल चलता महसूस हुआ… और कुछ देर में लण्ड में जैसे झटके लगाने लगे… अब मैं उसको पकड़ कर जोर से कह्राया ‘आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह RU आह्हह्ह उह्ह्ह्ह’ और कहते कहते मेरे लण्ड में हिचकोले आने लगे और हर झटके में मेरे लण्ड से गर्म गर्म रस जैसा वीर्य बन्दूक की गोली की तरह निकल कर RU की कुंवारी गांढ़ की गहराई में भरने लगा…

मगर उसको चोदने में इतना जोश चाड गया था की लण्ड काफी देर हिचकोले खाता रहा और काफी माल फेंकता रहा… कुछ देर बाद मैं उसके उपर ढीला होकर मगर उससे चिपका कर लण्ड अंदर ही डाले हुए RU के उपर लेट गया… अब भी बीच बीच में लण्ड झटका खा जाता था…बहुत दिन बाद ऐसा हुआ की पेलने के बाद भी लण्ड का जोश ठंडा नहीं हुआ…

अब तो वीर्य बाहर रिसने लगा तो उसकी गांढ़ जैसे बजबजा गयी… कुछ देर मैंने उसको वैसे ही हलके हलके चोदा… फिर लण्ड बाहर निकला तो उसकी गांढ़ से वीर्य बाहर आने लगा… उसको मैंने गद्दे के कोने से पोछ दिया और हमने जल्दी जल्दी कपड़े पहने.

‘आप बहुत वायोलेंट हो गए थे ’ उसने कहा ‘सौरी यार… तुम बहुत सुन्दर हो ना इसलिए जोश बढ़ गया था हाहा’ मैंने कहा ‘आपने गांढ़ डैमेज कर दी हाहा’ ‘सुबह तक सही हो जायेगी… घबराओ मत हाहाहा’ मैंने कहा ‘बहुत दर्द हो रहा है’ सब ठीक हो जायेगा… बस अब आराम से सो जाना’ मैंने कहा और फिर पूछा ‘मज़ा आया कि नहीं?’

तो वो शरमाया ‘जी… उह… मज़ा तो आया’ ‘बस फिर क्या है… एक दो बार और करोगे तो दर्द बिलकुल नहीं होगा और मज़ा पूरा आयेगा हाहाहा बस मज़ा लो’ ‘आप मुझे गे बना दोगे’ ‘ये सब बकवास है… मज़ा आये तो करो वरना मना कर दो’

सुबह उठा तो वो मुझे और हसीन लग रहा था… और उसकी आँखों में कोई खास शर्म नहीं थी… वो बिलकुल पहले की तरह ऐसे कर रहा था जैसे पिछली रात कुछ हुया ही न हो…

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मैं काफी सब्र के बाद बाहर निकला तो देखा कुछ देर मैं परदे के एपेचय खड़ा उसकी जवानी निहारता रहा और फिर अंदर गया ‘क्या हुआ सोये नहीं?’ उसने पोकोहा ‘नहीं नींद नहीं आ रही है आज… ये क्या देख रहे हो?’ मैंने कहा ‘ऐसे ही थोड़ा बहुत लगा दिया था’

‘अच्छा फिल्मों की हिरोइन देख रहे हो हाहाहा’ मैंने कहा तो वो बोला ‘इसमें क्या बुराई है… फिल्म ही तो है’ मैं उसके गद्दे के एक कोने में बैठ गया ‘नहीं नहीं बुराई नहीं… ऐसे ही कहा तुम बुरा मान गए क्या?’ ‘नहीं नहीं ’ वो तुरंत बोला ‘हमारा मतलब था कि अब और क्या करें इसलिए देख रहे थे’ कुछ देर मैं कभी टीवी और कभी उसको देखता रहा….

To be continued…

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