Indian Gay Sex Story: A tale of two brothers: 7

Indian Gay Sex Story: A tale of two brothers: 7

Indian Gay Sex Story: A tale of two brothers: 7

Indian Gay Sex Story: RU अब अपने पूरे मर्दाने रूप में था… उसके अंदर अब कोई शर्म या झिझक नहीं थी उसकी आँखों से अब बस नंगी कामुक लालसा टपक रही थी… उसकी जवानी अब उसपे हावी थी और वो मुझपे अपना जादू चला रही थी. मैंने भी जोश में कर उसकी ती शर्ट ऊपर उठा कर उसका चिकना जिस्म खोल दिया था…

उसका पेट फ़्लैट था… छाती पर हलके से कटाव थे… झांटें ताज़ी थीं और जिस्म चिकना था… मैंने जब हाथ अंदर घुसाया तो पाया कि उसकी बाज़ू के नीचे भी बाल थे… मैंने कुछ देर उसका नंगा जिस्म सहलाया मगर अब मुझसे नहीं रहा जा रहा था. उसका लण्ड मेरे हाथ में उछल रहा था…

मैंने RU की आँखों में आँखें डालकर देखा… वो बस प्यारे से अंदाज़ में मुस्कुराया… ’क्या हुआ?’ उसने होंठ सिक्दोते हुए मेरे चेहरे पर सांस लेते हुए मुझसे पूछा ‘बहुत बढ़िया लौड़ा है तुम्हारा’ मैंने कहा ‘है ना?’ उसने पूछते हुए कहा ‘हाँ भाई सौलिड है’ कुछ देर वो लेते लेते मेरा सर सहलाता रहा और फिर मेरे अंदर उमंग अंगड़ाई लेने लगी…

‘चूस लो…चूसो ना’ उसने कहा तो मैंने सीधे उसके लण्ड पर अपनी नाक रखी और उसकी ऐसी ज़बरदस्त दिल मोह लेने वाले खुशबू थी की मेरे होश उड़ गए… उसके लण्ड से पसीने, पिशाब और जिस्म की मर्दानगी की मिली जुली मस्त खुशबू थी… मैं कुछ देर तो बस उसके लण्ड को नाक से सहला कर सूंघता ही रहा और फिर मैंने उसपे अपने होंठ फेरे तो RU ने मस्ती से भरते हुए अपनी जांघें फैला दिन और एक अहथ मेरे सर पर रख दिया…

फिर मैंने जीभ निकाली और उसको लपलपाते हुए उसके लण्ड को चाटा ‘उह्ह्ह्ह्ह्ह बहनचोद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द… सिआअह्ह्ह्ह्ह्ह’ आहते हुए RU बिस्तर से एक फुट ऊपर उछाल गया… मैंने तक तक उसके लण्ड को थाम कर उसका सुपाडा खोलकर उसपे जीभ फिराना शुरू कर दिया और RU ने मस्ती से भर कर अपने घुटने मोड़ लिए…

फिर जब तक मैंने अपना मुंह खोल कर उसके लण्ड को पूरा चूसना शुरू किया तब तक RU को उस अहसास की आदत पड़ गयी और वो कमर उठा उठा कर मुझे अपना ल्न्द्चुस्वाने लगा… उसका तगड़ा लण्ड मेरी हलक से टकराने लगा और मैंने उसपे अपने होंठ जकड़ दिए जो उसके लण्ड से रगड़ने लगे…

अब उसी सब के बीच मैंने उसकी पैंट उतार दी… फिर कुछ देर बाद उसने मुझे बगल में लिटा कर वो मेरा जिस्म सहलाने लगा तो मेरी गांढ़ में आग लगने लगी. उसकी रगड़ में कशिश थी… देखते देखते उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया जबकि वो अपनी ती शर्ट पहने था… हालाँकि वो ऊपर उठी थी…

उसे मेरे जिस्म पर इधर उधर जहाँ हुआ अपना लण्ड रगड़ा और फिर मैं उसके बिना तड़पने लगा तो मैंने कहा ‘RU मेरी गांढ़ मारो’ तब तक वो फ्रैंक हो चुका था ‘गांढ़ फाड़ दें?’ ‘हाँ हाँ हाँ RU फाड़ दो… जैसे मैंने पहाड़ी थी वैसे ही मेरी फाड़ दो… आह आह RU… मेरी गांढ़ में लण्ड दो’ वो भी मेरे ये सब कहने से मस्ती से भर रहा था.

उसने अब मेरी तरफ़ करवट ले ली थी और धकाधक अपने लण्ड को मेरे मुंह में पेल रहा था… मुझे उसके लण्ड से पसीने का नमकीन स्वाद महसूस हो रहा था और हर बार जब मेरी नाक उसकी झांटों में घुटनी तो वहाँ भी तीखी सी मस्त खुशबू मुझे मदहोश कर देती. मैं कई बार उसके सुपाड़े को अपने हलक में दबाकर होठों से लण्ड को दबाते हुए अपनी नाक उसकी झांटों में दबाये रखता और उसको सूंघता.

RU अब पूरा कामुक था… अब वो जैसे होश में ही नहीं था… बस खूब गांढ़ भींच भींच कर मुझे लण्ड चुसवा रहा था. मैं अब उसकी कमर से लेकर गांढ़ तक सहला रहा था मगर उसने मुझे अपने छेद के आसपास नहीं टच करने दिया था… मैं जब भी कोशिश करता वो मेरा हाथ हटा देता. मगर उसका चिकना गठीला सांवला जिस्म सहलाने में मज़ा आ रहा था.

‘आह RO… आह… अब आपकी गांढ़ मारेंगे… मार लें ना?’ उसने तड़प कर कहा ‘उह हाँ RU लाओ न लण्ड मेरी गांढ़ में घुसा दो… खूब झटके देकर चोदना’ ‘पलटिए ना… अभी दिखाते हैं कैसे चोदेंगे आपको… खुश कर देंगे आह… पलटिए ना… आः RO आपकी गांढ़ मारेंगे… आह’

‘हाँ RU मुझे खूब चोदो… खुद तगड़ा चोदो’ ‘कहते हुए मैं मुद् गया और पलट कर मैंने अपनी फांकें हाथ से चीरकर उसको दावत दी ‘आह RO… मज़ा देंगे… खुश कर देंगे बहनचोद आह… RO… बड़ा गोरा गांढ़ है आपका… आह… आपकी गांढ़ मारेंगे’ कहते हुए वो मेरी जाँघों के बीच आया और अगले पल मुझे उसका लण्ड अपनी गांढ़ पर रगड़ता हुआ महसूस हुआ तो मैं भयंकर सिसकारी भरने लगा और गांढ़ उठाकर उसकी दरार के बीच उसके लण्ड को दबाने की कोशिश करते हुए वहाँ उसके लण्ड की गर्मी का मज़ा लेने लगा.

इस मामले में RU भी शातिर निकला… उसने फ़ौरन मेरे छेद का रास्ता नहीं ढूँढा बल्कि पहले वो भी बस मेरी गांढ़ पर अपने लण्ड को एक हाथ से साध कर रगड़ता रहा… मुझे उसमे बेहद मज़ा आ रहा था… उसका लण्ड हलचल मचाते हुए कूद कूद कर मेरी गांढ़ की मालिश कर रहा था और मेरे अंदर ज्वालामुखी भड़का रहा था… कुछ देर में मैं खुद उसके लिए तदपने लगा…

‘आह RU अब चोदो… घुसेडो… लण्ड अंडर घुसेडो… आह RU’

‘आह RO… मज़ा आ गया RO बहुत मस्त गांढ़ है आपकी’ उसके मुंह से ये सब सुनकर और मज़ा आ रहा था… तभी वो उठा ‘रुकिए तेल लगा लें’ उस समय वो जो बोल रहा था मुझे मज़ा आ रहा था और उसके हर शब्द मेरे अंदर आग भड़का रहे थे… उसने लण्ड पर तेल डाला और फिर अपने सुपाड़े को मेरे छेद पर रख कर हलके हलके जब उससे मेरे छेद को सहलाया तो मेरे होश उड़ गए.

‘आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह RU…. उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ मैं होश में नहीं था… मेरा छेद अपने आप ही कुलबुला रहा था… फिर उसने हाथ से लण्ड थामकर उसको दबाया तो मेरी गांढ़ धचाक से खुल गयी और उसका लण्ड अंडर घुसा ‘आह्हह्ह मादरचोद… आःह्ह्ह्ह्ह’ इस बार उसने मस्ती से सिसकारी भरी और मुझे गांढ़ में उसके लण्ड के पैनेपन का अहसास हुआ मगर उस हलके मीठे दर्द से ज़्यादा उस गुदगुदाती मस्ती का अहसास हुआ…

मेरे अंदर इस बार गांढ़ से कामुकता की लहर चढ़ी और दिमाग तक छा गयी… मैंने खुद ही अपनी गांढ़ उचकाई और उसका आधा लण्ड अपने आप अंदर घुसा लिया… उसने अपने दोनों हाथों से मेरे कंधे पकड़ कर मुझे गद्दे पर दबा दिया… और अपनी गांढ़ भींच कर बाकी का लण्ड अंदर घुसा दिया…

मैंने अपना छेद सिकोड़ कर उसकी सिलवटों के बीच उसके तगड़े लण्ड को जकड़ लिया… अब जब वो लण्ड अंदर बाहर करने लगा और मचल अंचल कर सिस्कारियां भरने लगा तो मुझे भी उतना ही मज़ा मिलने लगा… कुछ देर हम दोनों कुछ भी बोलने की हालत में नहीं थे… मगर कुछ देर चोदने के बाद मुझे मस्ती सूझने लगी ‘आह RU… आह्ह्ह अआः RU आह उह्हह’ मैंने सिसकारी भरी…

‘क्या हुआ दुखा रहा है क्या?’ ‘इतना मोटा घुसाओगे तो दुखायेगा ही’ ‘लो ना RO और लो… भीतर लो… पूरा लो… बड़ा मस्त गांढ़ है आपका’ मुझे बिहारी अल्द्कों के बोलने का लहजा भी बहुत मतवाला लगता है ‘आह RU दे दो… अंदर घुसाओ आह दे दो अंदर’ ‘लो ना दिए तो हैं… लो… लो… लो…’ वो ‘लो लो लो’ कहकर हर ‘लो’ पर लण्ड को अंदर धक्का देता और फिर अगला ‘लो’ कहने के पहले उसको निकाल कर फिर घुसता…

साथ में वो अपने नाखून मेरे कंधे पर गड़ाकर मुझे दबा कर जकड़ लेता… कभी झुकर मरे कंधे को चूमता… और फिर अपनी गांढ़ हिला हिला कर मुझे अपने लण्ड के धक्के देता… मैं भी उसके धक्कों पर अपनी गांढ़ फैलाकर उपर उठाता… मैं जितना गांढ़ उठाता उसको उतनी मस्ती मिलती और वो उतनी तेज़ी और ताकत से अगला धक्का देता और मुझे पकड़ता.

इसी सब चुदाई के मज़े लेने में ना जानी कितना समय लग गया… काफी देर धक्कमपेल करके RU ने पूरा मज़ा लिया… फिर कुछ देर बाद वो बोला ‘मज़ा आया ना RO?’ ‘हाँ यार बहुत भरपूर’ ‘हमको साला लगा नहीं था कि आप पेल्वाओगे’ ‘क्यूँ?’ ‘बस ऐसे ही… देख के लगता नहीं था’ ‘अब तो लग गया ना हाहाहा’ ‘अब काहे नहीं लगेगा… आप कबसे मूड में थे’ ‘जब मैंने दरवाज़ा खोला था’ वो बातों के साथ साथ धक्के देकर गांढ़ भी मार रहा था

अब उसके धक्के तेज़ होने लगे ‘भैयाह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह RO उह्ह्ह्ह आःह RO’ ‘हाँ बोलो’ ‘आह अब… अब… आः भैयाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अब अह अह अब…’ ‘झड रहा है क्या?’ मैंने पूछा… ‘उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह हाँ हाँ आह अह्हह्ह’ कहते हुए उसने मेरी गांढ़ में ताबड़तोड़ धक्के देकर अपना माल मेरे अंदर भर दिया…..

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फिर कुछ देर वो मुझे जकड़ कर मेरे उपर लेता रहा ‘अब उठा जाए?’ कुछ देर बाद वो बोला ‘उठना चाहते हो?’ ‘हाँ… अब सोया जायेगा…’ ‘अच्छा उठा… मगर दिल नहीं कर रहा है’ ‘अब क्या चिंता है… अब तो होता रहेगा… बोलिए होता रहेगा ना?’ ‘हाँ हाँ हमेशा होगा… जब मौका मिलेगा तब होगा’

‘हाहाहा वरना मौका निकल लेंगे… हाहाहा… इसके लिए तो मौका बनाया जाता है… बस पहली बार मौका चाहिए होता है… हाहाहा’ वो अपने कपड़े पहनते हुए कह रहा था… फिर तो मौका बनाया जाता है… बोलिए सही कहा ना?’ ‘आह हाँ सही कहा… अब मौका निकाल निकाल कर तुमसे करवाएंगे’ ‘आप माल मुंह में झ्द्वाते हैं?’ ‘हाँ’ ‘हम भी चुस्वयेंगे कभी’ उसने खुश होकर कहा और फिर हम दोनों वहीँ बाहर के कमरे में सो गए.

THE END

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