हिंदी समलैंगिक कहानी: ऑफिस की वो रात: 2

हिंदी समलैंगिक कहानी: ऑफिस की वो रात: 2

हिंदी समलैंगिक कहानी: हेलो दोस्तों, जैसा के आप सब जानते ही हो के मेरा नाम आशु है, , में हरियाणा के यमुना नगर का रहने वाला हू….!!

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अभी तक आपने पिछली कहानी ऑफिस की वो रात में पढ़ा की मुझे रजत पहली नज़र में ही भा गया था और उस रात जब मुझे देर हो गई तो रजत ने मेरी मदद की… लेकिन अभी कैब आने में समय था.. और रजत और मैं बातों बातों में कुछ ज़्यादा ही करीब हो गए… रजत ने मुझे अपनी तरफ खींचा और…

मैं रजत के मांसल शरीर से बेल की तरह लिपट गया, अपने हाथों से सहला सहला कर उसके मस्सल्स महसूस करने लगा। रजत अपने दोनों हाथों से मेरी गांड को दबा रहा था… इतनी मुलायम गांड उसने पहले कभी नहीं देखी थी. उसकी पैंट में कैद उसका लौड़ा उछलने लगा।

दोनों कुछ देर तक एक दूसरे के आगोश में चूमते रहे, फिर रजत ने कपड़ों के ऊपर से ही मेरी उंगली करनी शुरू कर दी।

“पैंट उतार…!” रजत ने हवस भरी आवाज़ में कहा। मैं अपनी पैंट उतारने लगा। इधर रजत ने अपनी जिप खोली और अपना आठ इंच का खालिस हरियाणवी लंड बाहर निकाला।

रजत का लंड देख मेरे मुंह में पानी आ गया, उस पर नसें उभर आईं थी, उसका गुलाबी सुपारा फूल गया था और उसकी मोटाई भुट्टे जितनी थी। ज्यादातर लोगों के लौड़े खड़े होने पर हलके से मुड़ जाते हैं, पर रजत का लौड़ा बिल्कुल सीधा खड़ा था।

इतना बड़ा लंड मैंने ज़मानों बाद देखा था। इससे पहले जब मुझे विनोद ने अपने बिस्तर पर जबरदस्ती चोदा था (मेरी कहानी पढ़ें : दिल्ली की नौकरी) (इंडियन गे साइट पर ही है ), तब मुझे प्रचंड लंड के दर्शन हुए थे, और मेरी गांड फट गई थी। रजत का लंड मोटाई में उतना ही था, मगर थोड़ा सा लम्बा था।

मुझे से रहा नहीं गया और मैंने घुटनों पर झुक कर रजत कर फुंफकारता हुआ लौड़ा अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा।

रजत के मुंह से हलकी से आह निकल गई- इतने दिनों बाद उसका लंड किसी के गरम-गरम, गीले मुंह में गया था।

मैंने लंड अपने गुलाबी होटों से दबा लिया और अपनी जीभ से सहला सहला कर उसे चूसने लगा। मुझे लंड का स्वाद बहुत अच्छा लग रहा था, मेरा मन कर रहा था कि पूरा का पूरा लंड अपने मुंह में भर लूँ, लेकिन बड़ा होने के कारण सिर्फ आधा ही ले पाया था। मैं पूरी लगन से रजत के लौड़े का रस पी रहा था, “सप.. सप…”

रजत ने मेरा सर पकड़ लिया और हल्की-हल्की आह भर के अपना लंड चुसवा रहा था। उसकी आँखें नशीली हो गई थी।

करीब दस मिनट तक मैं रजत की जांघों से लिपटा उसके लंड को ऊपर से नीचे तक चाट-चाट कर चूसता रहा। अब रजत से रहा नहीं जा रहा था।

“उठ..” उसने अपना लंड पीछे हटाते हुए कहा।

मेरे उठने पर रजत ने मुझे कमर झुका कर खड़े होने को कहा और मेरी पैंट और अंडरवियर नीचे खसका दी। मैं सूमो के पिछले दरवाज़े पर दोनों हाथ रख कर झुक गया, रजत मेरे पीछे खड़ा हो गया, उसने मेरी गांड का छेद टटोला और अपने लंड का सुपारा उस पर टिका कर उस पर थूक कर धक्का मारा। में अब तक 4-5 बार चुदवा चुका था लेकिन इतना बड़ा लंड मैंने कम ही लिया था।

लंड गप से अन्दर चला गया लेकिन मैं उछल गया,”हा….आह्ह्ह…!!” मेरे मुंह से हल्की सी आह निकल गई।

रजत ने अपना लौड़ा पूरा का पूरा अन्दर तक घुसेड़ दिया था, मेरे को तो चीखना ही था। रजत ने डाँट लगाई…”श श … कोइ सुन लेगा !”

और मेरे कन्धों को पकड़ कर अपना भूखा लंड हल्के-हल्के हिलाने लगा लेकिन उसके लंड के थपेड़े सहे नहीं जा रहे थे। मैंने अपने होटों को भींच लिया और सर झटक-झटक कर चुदवाने लगा। रजत अब फुल स्पीड में मेरी चिकनी चिकनी गांड मारने लगा, उसका लौड़ा मज़ा ले लेकर मेरी गांड के अन्दर-बाहर आ-जा रहा था। रजत आनंदातिरेक में इतना खो गया कि उसने चोदते-चोदते मेरे के चूतड़ पर एक चपत लगा दी।

बेचारा मैं चिल्ला उठा,”ईएह्ह…!!!”

“चुप साले… मरवाएगा क्या?” रजत हांफते हुए बोला।

“कम से कम मारो तो मत…” मैं कराहते हुए बोला।

रजत ने कोई जवाब नहीं दिया और कमर हिला हिला कर गांड मारने में लगा रहा। उसका लंड किसी पम्प की तरह मेरी गांड को गपा-गप चोद रहा था। मैं उसके धक्के झेल नहीं पा रहा था, कभी कभी मेरी पकड़ गाड़ी पर से फिसल जाती थी, तो कभी हल्की सी सिसकारी निकल जाती थी, पर मैं बेचारा चिल्ला भी नहीं पाता था।

करीब 15 मिनट तक रजत मेरी गांड में अपना गदराया लंड अटकाए उसकी सवारी करता रहा, फिर उसने जोर से मेरे कन्धों को दबोचा और हलकी सी आह के साथ मेरी गांड में झड़ गया,”हा..अह..!!”

मैंने उसका गर्म-गर्म वीर्य अपनी गांड में महसूस किया। करीब एक मिनट तक वो सर झुकाए, उसी तरह मुझको जकड़े खड़ा रहा।

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तभी अचानक बेसमेंट के एक कोने में रोशनी चमकी और एक गाड़ी की आवाज़ आई। आशु की कैब आ गई थी, दोनों ने फटाफट अपने कपड़े पहने और सामने आ गए।

रजत को मैंने अपने रूम पर चलने के लिए ऑफर किया पर वो ड्यूटी पर था.. फिर मिलने का वादा कर के मैंने उस से विदा ली… उसके बाद ये सिलसिला चल निकला.. उसके बाद क्या हुआ.. ये फिर कभी…

अभी मैं हरियाणा के यमुना नगर जिले में हूं. आपके पत्रों का इंतज़ार मुझे [email protected] पर रहेगा

आपका आशु

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